महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच अब स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) करेगी। शासन ने इस हत्या और आत्महत्या की गुत्थी को सुलझाने के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया है। गौरतलब है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एडीजी, मंडलायुक्त, आईजी और डीआईजी को जांच का आदेश पहले ही दे दिया था। इसी के साथ सभी जांच एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी घटना को संपत्ति के विवाद के रूप में देखा जा रहा है। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। घटना को लेकर कई साक्ष्य एकत्रित किए गए हैं। एक-एक घटना का पर्दाफाश किया जाएगा। दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील घटना है। लोग अनावश्यक बयानबाजी न करें। जांच एजेंसियों पर भरोसा रखें और उन्हें निष्पक्ष रूप से काम करने दें।
नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में एक भाजपा नेता का नाम भी सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री के सामने भी यह मुद्दा उठा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी कोई भी हो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने नरेंद्र गिरि के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया। कहा कि कुंभ के आयोजन में उन्होंने अभिभावक की भूमिका निभाई। आयोजन को वैश्विक बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। अखाड़ों के विकास के लिए वह हमेशा तत्पर रहे। साधु-संतों की समस्याओं को भी लगातार उठाते रहे। उनके निधन से समाज का हर वर्ग आहत है।
उल्लेखनीय है कि महंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उनका शव अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास में मिला। शाम को सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। पुलिस ने सूचना मिलते ही मठ को सीज कर दिया। जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि पर परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।