ग्रामीण वीरेंद्र और राजकुमार की माने तो बाघ की लोकेशन गजरिया फार्म के पास बैठे 70 से अधिक लंगूर बता रहे थे। बाघ की चहलकदमी अधिक होती है या मौजूदगी रहती है, वहां पक्षी और लंगूर चीखने-चिल्लाने लगते हैं। कुछ ऐसा ही नजर सोमवार शाम को रहा। टीम भी इन दोनों की लोकेशन का सहारा लेकर बाघ को रेस्क्यू करने का प्रयास कर रहा। बाघ को ट्रैकुलाइज करने का काम भी एक्सपर्ट कानपुर प्राणी उद्यान और दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट के डॉक्टर की टीम के साथ अलग अलग दिशा में काम कर रहे हैं।
युवा एकत्रित हो बना रहे रील
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया की बाघ को रेस्क्यू करने के लिए हर प्रयास किये जा रहे। वही सहिलामऊ, मीठेनगर, सिरगामऊ, कसमंडली कलां, किठाईपारा, फतेहनगर, शिवदासपुर ,बंशीगढ़ी, कसमडी खुर्द आदि गांवो में जन-जागरूकता अभियान चलाते हुए स्थानीय लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है लेकिन रील बनाने में मदहोश युवा अपनी जान को जोखिम में डालकर थोड़ी सी सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए जान की भी बाजी लगाने को तैयार हैं।
सुबह से लेकर शाम तक बड़ी संख्या में युवा मीठेनगर गांव की तरफ जाने वाले खड़ंजे पर बाघ की सबसे अधिक चहल कदमी रहती है इस सड़क के आसपास दोनों और जंगल है जहां पर युवा खड़े होकर रील बनाते हैं। मना करने के बावजूद भी नहीं मान रहे। वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से अपील की है कि लोग अपनी जान को जोखिम में ना डालें।