समाजवादी पार्टी ने चुनाव परिणाम को लेकर भविष्य की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। परिणाम घोषित होने के बाद बूथों का कड़ाई से मूल्यांकन किया जाएगा। प्रमुख नेताओं के बूथ पर मिले वोट के आधार पर संबंधित नेता का कद तय होगा। फिलहाल अब सभी की निगाह 10 मार्च पर टिकी है।
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चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कार्यालय में बैठना शुरू कर दिए हैं। सोमवार को दिनभर मिलने वालों का तांता लगा रहा। वह विभिन्न जिलों से आए नेताओं से फीडबैक लेते रहे। इस दौरान तमाम ऐसे नेता भी जुटे, जिन्हें सरकार बनने पर एडजस्ट करने का आश्वासन दिया गया है। ये नेता हर हाल में सपा की सरकार बनने का दावा करते रहे। इस बीच शीर्ष नेतृत्व ने यह कहकर पार्टी नेताओं की धड़कन बढ़ा दी है बूथवार मिले वोटों की समीक्षा की जाएगी।
संबंधित जिले के वरिष्ठ नेताओं के बूथ पर सपा और भाजपा को मिले मतों का ब्यौरे का अलग से मूल्यांकन किया जाएगा। बूथ पर मिले मत के आधार पर ही संबंधित नेता का कद तय होगा। जिन पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी अपने ही बूथ पर वोट हासिल नहीं कर पाए हैं, उनके भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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शीर्ष नेतृत्व की ओर से बूथ मूल्यांकन की मंसा जताए जाने के बाद कई वरिष्ठ नेताओं की धड़कन बढ़ गई है। इसमें ज्यादातर वे नेता हैं, शीर्ष नेतृत्व की परिक्रमा कर उपकृत होने की फिराक में रहते हैं। ऐसे नेता अब अपने बूथ पर पड़े वोटों और पार्टी को मिलने वाले संभावित वोटों को लेकर नए सिरे से गुणा गणित में जुटे हैं। हालांकि इसकी स्थिति मतगणना के बाद ही साफ होगी। दूसरी तरफ शीर्ष नेतृत्व के इस फैसले से उन नेताओं के चेहरे पर चमक लौट आई है, जो निरंतर अपने बूथ पर डटे रहे। अपने मूल बूथ के साथ आसपास के बूथों पर पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में एकजुटता करने वाले खुश हैं। उनका कहना है कि शीर्ष नेतृत्व के इस फैसले से पार्टी और संगठन को भविष्य में नई ताकत मिलेगी। जमीनी कार्यकर्ताओँ का कद बढ़ने से अच्छा संदेश जाएगा। ऐसे में बूथ पर संघर्ष करने वाले नेताओं की संख्या बढ़ेगी, जो पार्टी को गतिशील बनाए रखने में मददगार साबित होगी।