पांच दिन तक राजधानी की तहसीलों में लेखपालों ने काम नहीं किया। इससे करीब 30 हजार आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र लंबित हो गए। खास बात ये है कि लेखपालों की हड़ताल खत्म करने के लिए प्रशासन की ओर से शुरू में कोई खास पहल भी नहीं की गई। लंबित मामलों की संख्या बढ़ी तो जिला प्रशासन ने बुधवार को लेखपालों से वार्ता की। एडीएम प्रशासन ने लेखपालों के उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद लेखपालों ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा की।
20-20 किलोमीटर से तहसीलों में पांच दिन से फरियादी चक्कर लगा रहे थे। किसी को खतौनी निकलवानी थी तो कोई बच्चे के एडमिशन के लिए आय व निवास प्रमाण पत्र बनवाना चाहता था। हालांकि लेखपालों की हड़ताल के कारण लोगों की समस्या का निस्तारण न हो सका। अब गुरुवार से लेखपाल काम पर लौटेंगे। इसके बाद लंबित मामलों का निस्तारण हो पाएगा। लेखपाल एसडीएम मोहनलालगंज और तहसीलदार को हटाने तथा आरोपी वकीलों को गिरफ्तार करने की मांग पर अड़े थे।
मंडल में भी राजस्व के लंबित मामलों की भरमार
मंडलायुक्त ने बुधवार को सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के संबंध में वर्चुअल बैठक की। इस दौरान उन्होंने राजस्व से संबंधित मामलों के बारे में समीक्षा की। उन्होंने बताया कि मंडल के समस्त जनपदों में 3 साल से 5 साल की अवधि के 28,548 मामले लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा रायबरेली, हरदोई व उन्नाव में लंबित केस हैं।
उन्होंने पुराने मामलों का निस्तारण प्राथमिकता पर कराने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने कहा कि मंडल के सभी अपर जिलाधिकारी न्यायिक सप्ताह में पांच दिन कोर्ट में बैठकर लंबित प्रकरणों का निस्तारण करेंगे और डीएम इसकी साप्ताहिक समीक्षा करेंगे।