पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेशियों व रोहिंग्यों की हो रही तस्करी के मामले में केंद्रीय एजेंसियां भी पड़ताल में जुट गई हैं। मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है इस लिए केंद्रीय एजेंसियां सतर्क हैं। यूपी एटीएस द्वारा किए गए खुलासे में अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह सभी यूपी से बाहर के सदस्य हैं।
जानकारी के अनुसार 26 अक्तूबर को यूपी एटीएस ने अवैध तरीके से बांग्लादेशियों को भारतीय सीमा में प्रवेश कराने के बाद पश्चिम बंगाल में उनके भारतीय जाली दस्तावेज बनावाकर विदेश भेजे जाने का खुलासा किया था। इस मामले में एटीएस अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसमें से अधिकतर यूपी एटीएस की रिमांड पर हैं। अब इन लोगों के बारे में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी पड़ताल कर रही हैं कि आखिर कार किस तरह अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पार कर लोग भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे हैं और उनकी विदेशों में तस्करी कर दी जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में केंद्रीय अर्धसैनिक बल की सतर्कता टीम के अलावा एनआईए की भी नजर है। क्योंकि अब तक जो भी मामले सामने आए हैं उसमें सभी मामले यूपी से बाहर केहैं। इसमें एक भी मामला सीधे तौर पर यूपी से जुड़ा नहीं है। अभी तक जो लोग भी गिरफ्तार हुए हैं वह या तो यूपी के रास्ते दिल्ली या कोलकाता जाते समय गिरफ्तार किए गए हैं। जबकि बाकी दूसरे राज्यों से गिरफ्तार किए गए हैं या फिर दूसरे राज्य की सीमा वाले जिले से गिरफ्तारी हुई है। वहीं एटीएस के सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में यूपी एटीएस को इनपुट पूर्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पकड़े गए बांग्लादेशियों से मिला था। जिसके बाद एटीएस ने अपनी जांच का न सिर्फ दायरा बढ़ा दिया था बल्कि एक नई एफआईआर भी दर्ज कर नए सिरे से तफ्तीश शुरू की थी।
रतन मंडल भी 10 दिनों की रिमांड पर
बीते शुक्रवार को पश्चिम बंगाल से पकड़ कर यूपी लाए गए रतन मंडल की भी 10 दिनों की रिमंाड यूपी एटीएस को मिल गई है। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि रतन मंडल मानव तस्करी के इस सिंडीकेट का अहम सदस्य है। वह बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों को भारतीय सीमा में प्रवेश कराकर और भारतीय दस्तावेज तैयार कराकर विदेश भेजने का काम करता है। रतन से उसके सहयोगियों के बारे में और अब तक कितने लोगों को विदेश भेजा जा चुका है, इसकी पड़ताल की जाएगी।