गलत तरीक से संविदा से स्थाई किए जाने के मामले में बीते बृहस्पतिवार को 21 कर्मचारियेां का विनियमितीकरण रद्द करने के बाद अब मंगलवार को नगर निगम प्रशासन ने 42 स्थाई संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। जिसका आदेश भी जारी कर दिया गया है। यह कर्मचारी भी गलत तरीक से पक्की नौकरी पाने वाले थे मगर अब यह पूरी तरह से नगर निगम से ही बाहर हो गए हैं। ऐसे में अब पक्की नौकरी पाए जाने की उनकी उम्मीद पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
शासन के आदेश पर जुलाई 2012 में प्रदेश भर में संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को हटाने का आदेश हुआ था और जरूरत पर कार्यदायी संस्था केजरिए कर्मचारी लेने का आदेश हुआ था।
इस आदेश से नगर निगम के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले 200 कर्मचारिये हटाए गए थे। जिसमें से करीब 100 कर्मचारियों कार्यदायी संस्था केजरिए नौकरी कर ली मगर उतने ही कर्मचारी कोर्ट चले गए जिनको उनको राहत नही मिली। उसके बाद कुछ कर्मचारी फिर कोर्ट गए तो 2015 में कर्मचारियों को राहत मिली। उसके बाद 24 फरवरी 2016 को शासन ने उन सभी संविदा कर्मियों का विनियमितीकरण करने का आदेश दिया जो 31 दिसंबर 2001 तक नियुक्त हुए और शासनादेश जारी होने की तिथि तक उसी रूप में कार्यरत हैं।
ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति केलिए अधिसंख्य पद सृजन की भी अनुमति दी गई लेकिन इसी बीच 2018 न्यायालय ने विनियमितीकरण के मामले को लेकर दायर कर्मचारियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। जिसके बाद कर्मचारियों ने फिर अपील की जो अभी लम्बित हैं और उन पर अभी कोई आदेश न्यायायल का नही आया है। उसके बाद भी तथ्यों का छुपाते हुए जिन 25 कर्मचारियों को नगर निगम प्रशासन लाइटर व पोर्टर पद पर विनियमितीकरण था उनमें पहले चार का फिर 21 का विनियमितीकरण निरस्त कर दिया गया।
याचिका खारिज थी फिर कर रहे थे नौकरी
अपर नगर आयुक्त अभय पांडेय ने बताया कि विनियमितीकरण को लेकर न्यायालय ने 2018 में सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उसके बाद कुछ कर्मचारी अपील में गए। उस पर अभी कोई निर्णय नही आया है। वहीं 42 ऐसे कर्मचारी अभी भी तथ्यों को छुपाकर स्थाई संविदा पर काम रहे थे जो अपील में न्यायालय भी नही गए थे। उन सभी को सेवा हटा दिया गया है। याचिका खारिज होने के बाद भी यह कर्मचारी कैसे स्थाई संविदा पर काम करते रहे। इसकी जांच हो रही है। उसके लिए जो दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
मार्ग प्रकाश विभाग में न्यायालय से याचिका खारिज होने के बाद भी तीन साल से जो 42 स्थाई संविदा तथ्यों को छुपाकर नौकरी कर रहे थे उनको बर्खास्त कर दिया गया है।
अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त