लोकसभा चुनाव में वोटरों के ध्रुवीकरण से अप्रत्याशित सफलता हासिल करने वाली भाजपा इसी लाइन को आगे बढ़ाने में जुट गई है। लाउड स्पीकर से ‘लव जेहाद’ तक तमाम संवेदनशील मुद्दे उठाकर वह हिंदू जनभावनाओं को भुनाना चाहती है।
केरल, कर्नाटक और प्रदेश के कुछ पश्चिमी जिलों में प्राय: चर्चा में आने वाला ‘लव जेहाद’ घोषित-अघोषित तौर पर भाजपा के राजनीतिक एजेंडे में आ गया है।
लगता है कि भाजपा 11 विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव में ही नहीं, ‘लव जेहाद’ को ध्रुवीकरण के टूल की तरह लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहती है।
हर संवेदनशील मुद्दे पर दिखाई सक्रियता
लोकसभा चुनाव में सूबे में भाजपा के पक्ष में बड़े पैमाने पर वोटों का पोलेराइजेशन हुआ। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बने सांप्रदायिक माहौल ने भाजपा को संजीवनी देने का काम किया। नतीजतन 80 में से 73 सीटों पर भाजपा को कामयाबी मिली।
उस प्रयोग को भाजपा और आगे ले जाना चाहती है। लक्ष्य तो 2017 में प्रदेश की सत्ता पाना है लेकिन तात्कालिक तौर पर उसकी नजर उपचुनावों में फायदा लेने की है।
लोकसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा ने हर संवेदनशील मुद्दों पर सक्रियता दिखाई। चाहे वह किसी धर्मस्थल पर लाउडस्पीकर लगाने का विवाद हो, गौकशी की घटनाएं, महिलाओं से छेड़छाड़, धर्म परिवर्तन का मामला या दूसरे संप्रदाय के युवक से शादी करने का।
भाजपा के आक्रामक रुख और पुलिस-प्रशासन की कार्यवाही में पक्षपात के आरोपों के चलते प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव की रिकॉर्ड घटनाएं भी हुईं।
‘लव जेहाद’ पर चढ़ाया सियासी रंग
राधा-राधा की नगरी वृंदावन (मथुरा) से भाजपा ने हिंदू संगठनों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा उठाए जाते रहे ‘लव जेहाद’ के मुद्दे पर सियासी रंग चढ़ा दिया है। मकसद साफ है, बेटियों की सुरक्षा और सम्मान बड़े संवेदनशील मुद्दे हैं।
हर कोई इससे जुड़ा होता है। लव जेहाद जैसे मुद्दे उठाकर भावनात्मक तौर पर लोगों को जोड़े रखने और राजनीति संभावनाओं को परवान चढ़ाने का काम आसानी से हो सकता है।
एजेंडा नया नहीं
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष खालिद मसूद कहते हैं कि ‘लव जेहाद’ कोई नया एजेंडा नहीं है। आरएसएस इसे सालों से उठा रहा है। इसके नाम पर मुस्लिमों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। यह सिलसिला 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा।
वह कहते हैं कि 21वीं सदी में जब लड़के-लड़किया साथ पढ़ रहे हैं, नौकरी कर रहे हैं, घरों से हजारों किमी दूर रह रहे हैं, ऐसे में वे एक-दूसरे से शादी कर लें तो इसे मुद्दा नहीं बनना चाहिए। भाजपा समाज को बांटने के रास्ते पर चल रही है। हिंदू-मुस्लिम, दोनों को यहीं रहना है, फिर प्यार के साथ क्यों न रहें।
क्या है ‘लव जेहाद’
यूं तो ‘लव जेहाद’ का कोई विशिष्ट अर्थ नहीं है लेकिन पिछले कुछ सालों से हिंदूवादी संगठन इस शब्द का इस्तेमाल मुस्लिम लड़कों द्वारा हिंदू लड़कियों को झांसा या प्रलोभन देकर शादी करने और फिर धर्म परिवर्तन कराने की योजनाबद्ध कोशिशों के लिए कर रहे हैं।
वे इसके पीछे अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र मानते हैं। हालांकि पुलिस जांच में ऐसे किसी षड्यंत्र का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसके द्विवेदी कहते हैं कि साफ होना चाहिए कि जेहाद फॉर लव या जेहाद एगेंस्ट लव। प्यार (लव) पवित्र शब्द है। यदि भाजपा के लिए लव जेहाद का मतलब अल्पसंख्यकों के खिलाफ छिपा एजेंडा है तो यह उचित नहीं है, निंदनीय भी है।
लड़कियों से दुर्व्यवहार कोई भी करें, उसकी आलोचना होनी चाहिए, जबरन धर्मांतरण पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा को वर्गीय विभेद की बात करने के बजाए विकास के मुद्दे पर आगे बढ़ना चाहिए। लव जेहाद के बजाय भाजपा भाईचारे के लिए जेहाद करे तो अच्छा रहेगा।
लव जेहाद संघ का पुराना एजेंडा
सामाजिक गतिविधियों से जुड़े मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामवीर राठी कहते हैं कि लव जेहाद आरएसएस का पुराना एजेंडा है। अब भाजपा ने इसे अपना लिया है।
इसका अर्थ यह है कि भाजपा अब संघ के एजेंडे पर चलने लगी है। जनता को सब्जबाग दिखाकर केंद्र की सत्ता में आई भाजपा सरकार के पिछले तीन महीने के कामकाज के मायूसी है।
ऐसे में भाजपा की कोशिश है कि समाज में तनाव का माहौल बना रहा। राठी कहते हैं कि प्यार में जाति-धर्म नहीं देखे जाते। अकबर ने तो जोधा बाई का धर्म परिवर्तन नहीं किया था। संघ और भाजपा अफवाहें फैलाकर और एक झूठ को बार-बार बोलकर फिजा बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।
वेस्ट यूपी में पहले ही बना चुके मुद्दा
हिंदूवादी सोच के संगठन लव जेहाद को वेस्ट यूपी में कई सालों से मुद्दा बनाए हुए हैं। दरअसल, वेस्ट यूपी का सामाजिक ताना-बाना इस तरह का है, जिसमें दूसरे धर्म में शादी तो दूर, अंतरजातीय विवाह को भी बहुत पसंद नहीं किया जाता।
सामाजिक व्यवस्थाओं में अभी भी पंचायतों और खापों की भूमिका हैं। ये खापें अंतरजातीय और अंतर्धार्मिक विवाह के पक्ष में नहीं रहती है।
कथित छोटी जाति, एक गोत्र या एक गांव में शादी हो जाने पर ऑनर किलिंग जैसे मामले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे माहौल में लव जेहाद को मुद्दा बनाने के लिए आसानी से खाद-पानी मिल जाता है।
अरब से आ रहा लव जेहाद के लिए पैसा
‘लव जेहाद’ के खिलाफ लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता और सच संस्था के अध्यक्ष मेरठ के संदीप पहल कहते हैं कि हिंदू लड़कियों को फंसाने और उनका धर्मांतरण कराने के लिए षड्यंत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है।
‘लव जेहाद’ के लिए हवाला, स्कॉलरशिप, राहत सामग्री आदि के नाम पर या नौकरीपेशा लोगों के जरिये अरब मुल्कों से पैसा आता है।
वह कहते हैं कि केरल, कर्नाटक और वेस्ट यूपी में जेहाद आक्रामक तरीके से चला। मुस्लिम युवक हिंदू नाम रखकर हिंदू लड़कियों से नजदीकियां बढ़ाने के लिए टारगेट ओरियंटेड काम करते हैं।