जिस पालतू कुत्ते या बिल्ली के साथ आपने परिवार के सदस्य की तरह सालों गुजारे। जिसे अपने हाथों से खिलाया। जो बेहिचक आपके बिस्तर तक पर अपना हक जताता रहा, मौत के बाद उसका सम्मान के साथ अंतिम संस्कार भी न होना दुखद अहसास कराता है। हालांकि, जल्द ही आपको यह दर्द नहीं झेलना पडे़ेगा। एलडीए पालतू जानवरों का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने के लिए शहर के चार इलाकों में बिजली से चलने वाले शवदाह गृह बनाएगा।
एलडीए के मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने बताया कि रिहाइशी इलाकों की घनी होती आबादी के बीच पालतू जानवरों का क्रीमेशन उचित तरीके से करना, सबसे बड़ी चुनौती हो गई है। सबसे अधिक दिक्कत फ्लैटों में रहने वाले परिवारों को होती है। वहीं, लोग चाहते हैं कि उनके पालतू जानवर का अंतिम संस्कार उचित तरीके से हो। उसकी आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ तक कराते हैं। लोग इसके लिए भुगतान तक करते हैं। हालांकि, कई बार यह भी पता चलता है कि पैसा देने के बावजूद सही से अंतिम संस्कार करने की जगह उनके पालतू जानवर को कूड़े या नाले में फेंक दिया गया है।
सिंह ने बताया कि क्रीमेशन प्लांट में आधे घंटे में जानवर का अंतिम संस्कार कर एक बर्तन में अवशेष दे दिए जाएंगे। मालिक मन मुताबिक पूजा-पाठ संग इसका विसर्जन कर सकेंगे। एक प्लांट पर करीब 8.50 लाख रुपये का खर्च आएगा। चारों प्लांट पर कुल 34 लाख रुपये खर्च होंगे। अवस्थापना निधि से यह रकम खर्च की जाएगी। क्रीमेशन प्लांट से पर्यावरण भी साफ रहेगा। इस सुविधा के लिए न्यूनतम चार्ज लिया जाएगा।
यहां बन रही योजना
- गोमतीनगर विस्तार (बहुमंजिला अपार्टमेंट के पास सेक्टर-4)
- जानकीपुरम विस्तार (कुर्सी रोड)
- मानसरोवर योजना (सनराइज अपार्टमेंट के पास)
- शहीद पथ (अंसल गोल्फ सिटी या ओमेक्स टाउनशिप में जमीन की उपलब्धता के मुताबिक)
खुद महसूस कर चुके हैं कष्ट
इंदुशेखर सिंह खुद दो पालतू कुत्तों का अंतिम संस्कार करने के लिए यह कष्ट महसूस कर चुके हैं। पग को तो उन्होंने घर के लॉन में ही दफनाकर पौधा लगा दिया। हालांकि, जर्मन शेफर्ड के क्रीमेशन के लिए बाहरी व्यक्ति को शव दिया। उसका क्या हुआ, पता नहीं। उन्होेंने सोचा कि दूसरों को भी अपने पालतू जानवर का शव कूड़े में पड़ा देख दर्द होता होगा। ऐसे में उन्होंने यह सुविधा शुरू करने की योजना बनाई।