ऐशबाग में वाॅटर वर्क्स रोड पर स्थित नजूल भूमि पर प्रधानमंत्री आवास बनेंगे। इसके लिए भूमि का सर्वे कराकर नियोजन की कार्रवाई करने के लिए अपर सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी। यहां पर कुछ परिवार अवैध रूप से झोपड़ी व टीनशेड डालकर रह रहे हैं। ये अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां भी कर रहे हैं। नजूल अधिकारी व अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए गए हैं कि वह पत्रावली का परीक्षण करके अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करें।
इन भवनों का किया जाएगा रि-डेवलपमेंट
- बुलाकी अड्डा चौराहा के पास का नंदा काॅम्प्लेक्स
- अयोध्या रोड का कैलाश कुंज काॅम्प्लेक्स
- अलीगंज सेक्टर जी की दुकानें
- कानपुर रोड सेक्टर जी का काॅम्प्लेक्स- नेहरू एंक्लेव का अधूरा काॅमर्शियल काॅम्पलेक्स
- कपूरथला चौराहे के पास का एलडीए कॉम्प्लेक्स
नंदाखेड़ा काॅम्प्लेक्स : इसे 1986 में करीब 10 करोड़ की लागत से बनाया गया था। यहां दुकानों के साथ आवास भी बनाए गए। बनने के बाद से 28 फ्लैट व 120 दुकानें खाली ही रहीं और महज 22 के आवंटन हुए। जब यह बना तब ये इलाका बेहद उपेक्षित था। इंजीनियरों ने बिना किसी सर्वे के ही इसका निर्माण करा दिया। यदि यह काॅम्प्लेक्स सफल होता तो इसकी वर्तमान कीमत 100 करोड़ से अधिक होती। अब इसे गिराने और बनाने पर पैसा खर्च किया जाएगा। करीब दो साल पहले एक रिपोर्ट बनी थी, जिसमें सामने आया कि इसे गिराने में लागत से अधिक खर्च आ रहा है।
कैलाश कुंज काॅम्प्लेक्स : यहां 280 दुकान-फ्लैट बनाए गए थे, लेकिन आवंटित महज 11 ही हुए। दोनों जगह इस समय बड़ी संख्या में अवैध कब्जे हैं। इसमें एलडीए अधिकारियों-कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। यह जांच में पहले सामने आ चुका है। नंदाखेड़ा में तो एलडीए के ही कई कर्मचारी कब्जा जमाए हुए हैं।
अलीगंज सेक्टर जी मार्केट : यहां जो दुकानें बनाई गईं, उनकी लोकेशन सही नहीं है। इसी वजह से दुकानों को लोगों ने खरीदा ही नहीं। बाद में लोगों ने अवैध कब्जा भी कर लिया। जो खाली रहीं वह जर्जर हो गईं।
नेहरू एंक्लेव कामर्शियल काॅम्प्लेक्स : यहां पर सेना से जमीन का विवाद होने के बाद भी कमीशनबाजी के लिए निर्माण किया गया। सेना की आपत्ति के बाद काम रुका गया जो अब तक बंद पड़ा है।
जिम्मेदारों पर नहीं हुई कार्रवाई
कई दशक पहले जिन इंजीनियरों और अधिकारियों ने यह काॅम्प्लेक्स बनवाए थे, उन पर कभी काई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। एलडीए की ओर से कोई जांच भी नहीं कराई। इन योजनाओं के फ्लॉप होने के जिम्मेदारों को यूं ही बख्श दिया गया। जनता का पैसा ऐसे ही बर्बाद हो गया।