केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने 28 साल के एक युवक को नई जिंदगी दे दी। साफ-सफाई न रखने के कारण युवक के जननांग वाले हिस्से में संक्रमण हो गया था। इस संक्रमण से पहले तो उसके वृषण कोष (टेस्टिस) में गैंगरीन हुआ।
सही इलाज न मिलने के कारण ये संक्रमण जननांग तक पहुंच गया और वहां भी गैंगरीन हो गया। कहीं फायदा न मिलने पर जब वो केजीएमयू पहुंचा तो प्लास्टिक सर्जरी विभाग में प्रो. विजय कुमार ने माइक्रोसर्जरी कर उसका नया जननांग बना दिया। अब वो तेजी से स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।
प्रो. विजय कुमार ने बताया कि बहराइच निवासी युवक (28) ओपीडी में अपनी परेशानी लेकर आया था। जांच के बाद पाया गया कि उसे ‘फोर्नियर गैंगरीन’ बीमारी थी। ये बीमारी जननांग के हिस्से में सफाई न रखने के कारण या फिर मधुमेह रोगियों को होती है।
शर्म की वजह से छिपाता रहा बीमारी
संक्रमण की शुरुआत में इस युवक ने अपनी ये बीमारी छिपा ली। शर्म और सामाजिक प्रताड़ना से बचने के कारण वो खुलकर किसी से इस बारे में बात भी नहीं करता था। धीरे-धीरे जब संक्रमण वृषण कोष से बढ़कर जननांग तक पहुंच गया और गैंगरीन के रूप में बदल गया तब वो केजीएमयू आया।
युवक की जांच में पता चला कि उसे मधुमेह नहीं है। प्रो. विजय कुमार ने बताया कि बीती नौ अप्रैल को युवक की सर्जरी की गई। इसमें उसके बाएं हाथ से खाल और मांसपेशियां लेकर नया जननांग बनाया गया। रेडियर आर्टरी व वेन से उसमें पेशाब का रास्ता बनाया।
वैवाहिक जीवन में नहीं आएगी कोई दिक्कत
जननांग में रक्त संचार (खून की दौड़ान) के लिए उसे जांघ की आर्टरी और वेन से जोड़ा गया। जिससे मांसपेशियों और खाल को जीवित रखा जा सके। प्रो. विजय कुमार ने बताया कि आर्टरी व वेन रक्त संचार के लिए आवश्यक होती है जबकि नर्व संवेदना का कार्य करती है।
लगभग छह घंटे की सर्जरी के बाद इसे जननांग को माइक्रोसर्जरी से सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया। इस सर्जरी में उनके साथ रेजीडेंट डॉ. प्रेमशंकर व डॉ. रिचा शामिल थीं।
इसके अलावा डॉ. शोभना जफा के नेतृत्व में एनेस्थीसिया की टीम ने इस सर्जरी में मदद की। प्रो. विजय ने बताया कि युवक अभी प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती है। जल्दी उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मरीज का वैवाहिक जीवन भी सफल रहेगा।