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क्लीवेज विवाद पर जूही ने सुनाई 'सुकरात कथा'

Thu, 25 Sep 2014 11:19 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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दीपिका पादुकोण के क्लीवेज विवाद पर जहां हॉट टॉक छिड़ी हुई है। इस मसले पर गॉसिप तो जायज है पर फिलॉसफी थोड़ी अजीब लगती है। लेकिन, जूही चावला यूं ही चुलबुली और मेच्योर एक्ट्रेस मे शुमार नहीं होतीं।
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एक चैनल के प्रमोशन के सिलसिल में नवाबों के शहर लखनऊ पहुंची जूही चावला के सामने क्लीवेज विवाद का सवाल आया, तो उन्होंने दर्शन के जरिए उसका जवाब दे डाला।

फिल्मी इंडस्ट्री में गॉसिप बने दीपिका पादुकोण और एक अंग्रेजी अखबार के बीच उपजे विवाद के बारे में जब चंचल जूही से पूछा गया, तो वो सुकराथ कथा सुनाने लगीं।
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बोली, 'एक बार सुकरात के शिष्य ने कहा, मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं। सुकरात ने पूछा, क्या वह सच है, क्या वह अच्छी बात है या क्या उससे किसी की मदद हो सकती है? शिष्य ने जवाब दिया, नहीं ऐसा तो नहीं। सुकरात बोले, ऐसे मुद्दे में क्यों पडऩा, जो न सच हो, न अच्छा और न ही उससे किसी की मदद की जा सके।'

सकारात्मक नजरिए से बदलती है किस्मत

चंचल, चुलबुली और शोख अदाएं अभिनेत्री जूही चावला की पहचान हैं। लेकिन उनकेव्यक्तित्व का दूसरा पहलू है उनका नजरिया। जूही मानती हैं कि सकारात्मक सोच से ही किस्मत बदलती है।

‘आई एम’ फिल्म में सहायक प्रोड्यूसर रह चुकी अभिनेत्री एक्टिंग को डायरेक्शन से अधिक महत्व देती हैं। कोलकाता नाइट राइडर से जुड़ाव पर कहती हैं कि जीत पहले ही मिल जाए तो दिमाग खराब हो जाता है।

हाल ही में उन्हें एक निजी चैनल का ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है। जिसके प्रमोशन केसिलसिले में मंगलवार को वह लखनऊ पहुंची थीं। यहां उन्होंने फिल्म से इतर अपनी फिटनेस, लखनऊ और राजनीति से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी।

धारावाहिक देख निकल आते हैं आंसू

चैनल का ब्रांड एम्बेसडर बनाए जाने पर खुशी जाहिर करते हुए जूही कहती हैं कि चैनल का कॉन्सेप्ट अच्छा लगा। इसलिए जुड़ गई। इसमें महिलाओं पर फोकस्ड सीरियल हैं, जिनकी कहानियां दिल को छू लेने वाली हैं। मेरा पसंदीदा शो ‘सिस्टर दीदी’ है, जबकि ‘तुम साथ हो जब अपने’ लखनऊ की पृष्ठïभूमि पर आधारित स्टोरी है।

इसके अलावा ‘सिंघासन बत्तीसी’ आदि सीरियल भी अच्छे हैं। आगे कहती हैं कि कहानियां ऐसी हैं, जिन्हें देखकर कई बार आंसू निकल आते हैं।

फिटनेस का राज पूछने पर अभिनेत्री मुस्कुराते हुए कहती हैं कि हंसकर खुद को फिट रखती हूं। चूंकि, हंसना खुद में अच्छी एक्सरसाइज है। इसलिए खुश रहती हूं और हंसती हूं। इसके अलावा सुबह-सवेरे योगा जरूर करती हूं और ध्यान लगाती हूं। इससे मन को शांति मिलती है।

कौन देगा उमराव व जोधा के रोल

जूही कहती हैं कि उमराव, जोधा जैसे किरदार निभाने की इच्छा है, लेकिन अब ऐसे रोल मुझे कौन देगा। किरदार ऐसे मनोरंजन के साथ-साथ कॉमेडी व मूल्यपूरक होने चाहिए।

जूही ने कहा कि चैनल के अगले फेज में बनने वाले धारावाहिकों में शायद नजर आऊं। बॉलीवुड में महिला कलाकारों के साथ भेदभाव के सवाल को जूही ने दो टूक शब्दों में नकार दिया।

बताया कि मेरी फिल्म ‘आई एम’ लीक से हटकर बनी थी। लेकिन उसे दर्शकों का वह रेस्पांस नहीं मिला। चूंकि, बॉलीवुड में मनीमेकिंग फिल्म्स बनाई जा रही हैं। इसलिए सीरियस सिनेमा प्रभावित होता है। दूसरे, कहानी की डिमांड भी मायने रखती है।
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मोदी से जूही को उम्मीद

डायरेक्शन के बारे में जूही कहती हैं कि फिल्म ‘आई एम’ में मेघा का किरदार निभाया, जोकि एक कश्मीरी पंडित है। फिल्म की सहायक प्रोड्यूसर रहीं अभिनेत्री कहती हैं कि निर्देशन की फील्ड में जाने के बारे में सोचती हूं। लेकिन फिलहाल पूरा फोकस एक्टिंग पर ही है। इन दिनों दो स्क्रिप्ट हैं, जिन्हें पढ़ नहीं पा रही हूं। उसमें से एक को रिजेक्ट भी कर चुकी हूं।

जूही कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में इच्छाशक्ति दिख रही है। उनसे उम्मीद की जा रही है। वह काफी कुछ देशहित में कर रहे हैं। जिसे सराहा जाना चाहिए। राजनीति में एंटर करने के सवाल पर हंसते हुए कहा कि आगे चलकर सोचूंगी राजनीति केबारे में। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं के लिए बहुत जगह है।
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