मुजफ्फरनगर-शामली के सांप्रदायिक दंगे में मरने वालों के 56 आश्रितों को नौकरी देने का शासनादेश जारी कर दिया गया है।
नौ मृतक आश्रित को बाबू और 47 को चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नौकरी मिलेगी। एक आश्रित की उम्र 18 साल से कम है जबकि पांच मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई।
15 सितंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मृतकों के एक-एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी। दंगे में कुल 62 लोग मारे गए थे। एक आश्रित की उम्र 18 साल से कम है जबकि पांच मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि नौ मृतक आश्रितों को समूह ‘ग’ के पदों पर और 46 को समूह ‘घ’ के पदों पर नौकरी दी जाएगी। समूह ‘ग’ के नौ पदों में सात को पंचायती राज और दो को बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाई जाएगी।
47 मृतक आश्रितों की योग्यता समूह ‘ग’ (लिपिकीय संवर्ग) की नहीं है। उन्हें समूह ‘घ’ (चतुर्थ श्रेणी) के पदों पर राजस्व विभाग, पीडब्लूडी, ग्राम्य विकास विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग में नौकरी देने का निर्णय लिया गया है।
इस बारे में संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को निर्देश दे दिए गए हैं।