अब तक लाइलाज माने जाने वाले एचआईवी-एड्स के उपचार की दिशा में उम्मीद की नई किरण दिखाई दी है। जीन एडिटिंग के जरिये संक्रमित व्यक्ति की कोशिकाओं से एचआईवी का वायरस निकालकर इस बीमारी का स्थायी इलाज करना संभव हो सकेगा।
शुरुआती दौर में इस शोध में सफलता मिली है। अब मानव पर इसका ट्रायल किया जा रहा है। इसके सफल होने पर इलाज की यह प्रणाली काम में लाई जा सकेगी।
केजीएमयू के हेमेटोलॉजी विभाग में ब्लड कैंसर के इलाज के दौरान होने वाले ऑटोलोगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट के साथ जीन एडिटिंग का उपयोग करके इसे आसान बनाया जा सकेगा। इसको लेकर केजीएमयू के चिकित्सकों में भी उत्साह है।
हेमेटोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एके त्रिपाठी के अनुसार एचआईवी-एड्स के स्थायी इलाज के लिए लगातार शोध हो रहे हैं। इस शोध को अब नई दिशा मिल गई है।
एचआईवी वायरस कोशिकाओं में जाकर ठहर जाता है। दवाओं के प्रभाव से वायरस अन्य व्यक्ति को संक्रमित नहीं कर सकता है, लेकिन शरीर में मौजूद होने से पूरी तरह से व्यक्ति को ठीक नहीं होेने देता है।
इसलिए जीन एडिटिंग का सहारा लिया जा रहा है। इसे गिप्सर तकनीक कहा जाता है। इसके तहत वायरस को कोशिकाओं से अलग कर दिया जाता है।
विभाग में ब्लड कैंसर के मरीजों में ऑटोलोगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान उस व्यक्ति के शरीर की ही स्वस्थ कोशिका से क्षतिग्रस्त हिस्से को बदल दिया जाता है।
इसे ब्लड कैंसर का स्थायी इलाज संभव हो पाता है। इसी तकनीक को लेकर हुए शोध में शुरुआती सफलता मिली है। इसलिए जैसे ही इसका ट्रायल सफल होगा केजीएमयू में भी इसका उपयोग करके एचआईवी-एड्स के मरीजों को स्थायी इलाज मिल सकेगा।
लेते रहें नियमित दवाएं
प्रो. एके त्रिपाठी के अनुसार इस समय टीएलडी एड्स की मानक दवा है। इसके नियमित सेवन से संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। इसके दुष्प्रभाव भी नहीं हैं। हालांकि दवा के उपयोग तथा जागरूकता कार्यक्रम के बावजूद अभी भी एड्स के केस में ज्यादा कमी नहीं आई है। इसलिए यह जरूरी है कि दवा और जागरूकता दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
जेल में होगी एचआईवी संक्रमितों की पहचान, मिलेंगी दवाएं
राजधानी में एचआईवी-एड्स संक्रमितों की पहचान और इलाज का दायरा अब और बढ़ाया जाएगा। इसके तहत एचआईवी-एड्स से पीड़ित कैदियों को जेल में ही जांच और दवाओं की सुविधा दी जाएगी। केजीएमयू में चल रहे एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर का दायरा बढ़ाने के लिए अब जेल में लिंक एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर खोला जाएगा। विश्व एड्स दिवस की पूर्व संध्या पर केजीएमयू के एआरटी सेंटर के इंचार्ज डॉ. डी हिमांशु ने यह जानकारी दी। डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि इस समय संस्थान के जरिये 2855 एचआईवी-एड्स पीड़ितों का इलाज चल रहा है। इनमें से करीब 200 बच्चे हैं। एड्स के खिलाफ जागरूकता तथा इससे पीड़ितों के लिए इलाज व जांच को और बेहतर बनाने के लिए हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।
असमानताओं को समाप्त करें, महामारी को समाप्त करें
इस बार की थीम, ‘असमानताओं को समाप्त करें, एड्स को समाप्त करें, महामारी को समाप्त करें’, रखी गई है। योग के द्वारा एचआईवी एड्स मरीजों का शारीरिक, मानसिक एवं स्पिरिचुअल स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए काम किया जा रहा है। मिशन संपर्क से दूरदराज के मरीजों को मौके पर ही दवाएं दी जाएंगी। इसी तरह केयर एंजल प्रोग्राम चलाया गया, जिससे अन्य विभागों में विशेषज्ञ सलाह के लिए मरीजों के जाने पर अच्छी सुविधाएं दी जाती हैं। अब तक इसके माध्यम से करीब 200 मरीज सुविधा ले चुके हैं।
संक्रमितों को हुए सामान्य बच्चे
डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि अगर कोई संक्रमित दूसरे संक्रमित से शादी करना चाहता है तो उनका पंजीकरण कर सहायता दी जाती है। दवाओं के जरिये उनमें संक्रमण को रोक दिया जाता है। यहां तक कि उनके हो रहे बच्चों में भी संक्रमण नहीं मिला है। अब तक 300 से ज्यादा लोगों का इसके तहत पंजीकरण किया गया है और 55 की शादी हो चुकी है।