महाराष्ट्र के जलगांव जिले में बुधवार को लखनऊ से मुंबई जा रही पुष्पक एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह के बाद हुए हादसे में बहराइच के दो जबकि गोंडा के एक व्यक्ति की मौत हुई है। हादसे में अब तक कुल 12 लोगों की माैत हो चुकी है जबकि कई लोग घायल हैं।
पुलिस के अनुसार हादसे में मरने वालों में बहराइच के बौंड़ी थाने के कंदौंसा गांव निवासी 28 वर्षीय बाबू खां व नबावगंज थाना क्षेत्र के गंगापुर गुलहरिया निवासी इमितियाज अली (34) मंगलवार को घर से रवाना हुए थे। हादसे में दोनों की मौत की खबर बृहस्पतिवार को परिजनों को मिली। वहीं, गोंडा के असरना गांव निवासी नसीरुद्दीन की भी ट्रेन से कटकर मौत हुई है।
ट्रेन दुर्घटना में मरने वाले 12 लोगों में से 10 की पहचान हो गई है। रेल मंत्रालय ने जलगांव रेल दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को 1.5-1.5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, गंभीर रूप से घायलों को 50,000 रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को 5 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की गई है।
चाय बेचने वाले ने फैलाई थी आग की अफवाह : पवार
जलगांव में ट्रेन दुर्घटना एक चाय बेचने वाले की वजह से हुआ। उसने ही ट्रेन में आग लगने की अफवाह फैलाई थी। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने बृहस्पतिवार को यह दावा किया। उन्होंने कहा, इस अफवाह के कारण लोग घबरा गए और कुछ यात्री ट्रेन से कूद गए और सामने से आ रही कर्नाटक एक्सप्रेस की चपेट में आ गए।
पवार ने कहा, उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती से आए दो यात्रियों ने चायवाले की आग लगने की आवाज सुनी और अन्य लोगों को इसके बारे में बताया, जिससे सामान्य डिब्बे और बगल के कोच में लोगों में दहशत फैल गई और यात्री कूदने लगे।
वहीं, प्रयागराज में रेल राज्य मंत्री वी सोमन्ना ने दावा किया आपातकालीन चेन के दुरुपयोग के कारण जलगांव की घटना हुई है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि सात यात्रियों ने आपातकालीन चेन खींची थी। इसके बाद आग की अफवाह फैलने से लोग ट्रेन से कूद गए।