केस 1 - लखनऊ कैंट स्थित बूचड़खाना वैसे तो कैंट बोर्ड की जानकारी के अनुसार बंद है, लेकिन इसमें इस समय तीस भैंसे बंधी हैं। एक हॉल में करीब 100 खालें भी हैं, जो शायद हाल में वध किए गए मवेशियों की हैं।
2017 में बना एसटीपी अधूरा केस 2 - गोमतीनगर विस्तार में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पीछे मौजूद 19 एमएलडी क्षमता का एसटीपी एलडीए द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सितंबर 2017 में पूरा हो चुका है। मिलियन छोड़िए, एक लीटर पानी भी आज तक इसने साफ नहीं किया। इसे बनाने में 56 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
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कचरे से पाटी जा रही जमीन केस 3 - गोमतीनगर विस्तार के राप्ती अपार्टमेंट और गोमती नदी के बीच मौजूद जमीन से पहले कई मीटर खोद कर हजारों टन बालू और मिट्टी निकाल ली गई, और अब यहां हुए गड्डों को सॉलिड वेस्ट से पाटा जा रहा है।
केवल ये तीन नहीं ऐसी कई गड़बड़ियां नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल उप्र की मॉनिटरिंग कमेटी को उस समय देखने को मिलीं जब वह सोमवार को राजधानी का निरीक्षण करने निकली। टीम ने देखा कि किस तरह प्रदूषण नियंत्रण के लिए कागजों पर काम हो रहा है।
बदहाल हैदर कैनाल
निरीक्षण करती एनजीटी की टीम
- फोटो : amar ujala
निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जाएगी। वहीं एलडीए सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को समस्त संबधित दस्तावेजों सहित मंगलवार सुबह 11 बजे विभूतिखंड स्थित एनजीटी के दफ्तर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण में शामिल लखनऊ के पूर्व जिला जज व समिति के सचिव राजेंद्र सिंह ने बताया कि बूचड़खाना बंद होने की बात कही गई थी, लेकिन टीम को यह खुला मिला और यहां 30-35 भैंसें बंधी मिलीं, जिसे संभवत: वध के लिए रखा गया था। 100 से अधिक वध किए पशुओं की खाल मिली।
कैंट बोर्ड के सीईओ अमित कुमार मिश्रा को फोन करके बूचड़खाने के बारे में पूछा, जिन्हाेंने बताया वह तो काफी समय से बंद हैं। इस पर जब उन्हें कहा गया यह बूचड़खाना तो चल रहा है, तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए। उनसे रिपोर्ट मांगी गई है।
बदहाल हैदर कैनाल : केकेसी से लेकर लोहिया पथ तक
कमेटी ने हैदर कैनाल का केकेसी से लेकर लोहिया पथ तक निरीक्षण किया। टीम को जगह-जगह सॉलिड वेस्ट का ढेर मिला। लोहिया पथ के निकट लगाए गए एसटीपी खराब मिले।
सैंकड़ों एकड़ खाली जमीन पर पहले खनन, फिर भर दिया कूड़ा
अवैध खनन के बाद गड्ढों को कूड़े से पाट दिया गया
- फोटो : amar ujala
गोमती नगर महासमिति ने विस्तार के हालात को लेकर एनजीटी में शिकायत की थी। कमेटी पहुंची तो उसे ग्रीनवुड अपार्टमेंट, राप्ती अपार्टमेंट, सुलभ आवास के आसपास कूड़े का ढेर मिला। राप्ती अपार्टमेंट और गोमती नदी के तटबंध के बीच मौजूद सैकड़ों एकड़ खाली जमीन पर भरपूर खनन के बाद यहां गड्ढों में कूड़ा और प्लास्टिक भरकर उसके ऊपर मार्ग बनाया जा रहा है।
कमेटी सदस्यों का कहना है कि इससे भूमि के साथ-साथ गोमती व भूमिगत जल के प्रदूषित होने की आशंका है। निरीक्षण के दौरान गोमतीनगर महासमिति सचिव उमाशंकर दुबे, सेक्टर चार कावेरी रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन सचिव अमित सिंह और सहज आवास योजना सचिव अंकुर कुमार भी मौजूद थे।
पंपिंग स्टेशन बना पर चला कभी नहीं
सेक्टर चार में मौजूद सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) गंदे पानी को भरवारा एसटीपी पहुंचाने के लिए बनाया गया था। जांच में सामने आया कि इसमें पांच पंप लगे हैं, लेकिन क्षमता कितनी है, यह एलडीए के इंजीनियर नहीं बता सके। तीन पंप कभी स्टेशन पर लगाए ही नहीं गए। बाकी दो पंप भी बेहद थोड़े पानी को पंप कर रहे थे, जिसके भरवारा तक पहुंचने में भी कमेटी ने संदेह जताया।
गोमती नगर विस्तार के विभिन्न हिस्सों के निरीक्षण में सामने आया कि यहां कुछ रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से व्यवासयिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इनमें दुकानों से लेकर सब्जी मंडियां तक चल रही हैं। इनसे निकला कचरा अपार्टमेंट्स के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर डाला जा रहा है। यह इलाका डंपिंग साइट की तरह नजर आता है।