इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय समेत सभी संबंधित विभागों से एनओसी लेनी होगी। पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से सटी सीमा की तरह यहां इस तरह की एनओसी से छूट नहीं मिलेगी। पीडब्ल्यूडी ने नेपाल सीमा पर भी इस छूट की मांग की थी, लेकिन उच्चस्तरीय बैठक में इसकी मनाही कर दी गई है।
यूपी में भारत-नेपाल सीमा पर 599 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी है। पहले चरण में 255 किमी लंबी सड़क को मंजूरी दी गई। यहां काम भी लगभग पूरा हो चुका है। दूसरे फेज में 344 किसी लंबी सड़क में से 300 किमी सड़क वन क्षेत्र में आ रही है। इसलिए इस सड़क को बनाने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटने पड़ेंगे। ये पेड़ आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर के भी हैं। लिहाजा केंद्र और राज्य से पर्यावरणीय एनओसी मिलने में दिक्कत आ रही है।
कई दौर की बैठकों के बावजूद जब गतिरोध बना ही रहा तो पीडब्ल्यूडी ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन बार्डर की तरह यहां भी पर्यावरणीय एनओसी से मुक्ति देने का प्रस्ताव रखा। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह व रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कहा गया कि नेपाल हमारा मित्र राष्ट्र है। इसलिए इस सीमा पर सड़क बनाने के लिए उस तरह की छूट देने की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन सीमा पर दी गई है।