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यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : संपत्ति की रजिस्ट्री कराने से पहले डीएम के यहां देना होगा आवेदन

Tue, 15 Jun 2021 12:03 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

प्रदेश में अब मालियत के आधार संपत्ति बिक्री पर स्टांप शुल्क डीएम तय करेंगे। कैबिनेट ने संपत्ति मूल्यांकन नियामवली में संशोधन को मंजूरी दे दी है।
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cm yogi - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रदेश में अब फ्लैट, जमीन, मकान वन दुकान आदि भू-सम्पत्तियां की मालियत के आधार पर स्टांप शुल्क का निर्धारण जिलाधिकारी के स्तर से किया जाएगा। इससे जहां संपत्ति रिजस्ट्री कराते समय स्टांप शुल्क तय करने को लेकर होने वाले विवाद खत्म होंगे, वहीं एक मालियत की संपत्ति के स्टांप शुल्क में एकरुपता आएगी। स्टांप एवं रजिस्ट्री विभाग द्वारा रखे गए ‘संपत्ति मूल्यांकन नियामवली-1997’ में संशोधन प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

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स्टाम्प व पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि कैबिनेट के इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब प्रदेश में भू-सम्पत्तियों की कीमत तय करने और रजिस्ट्री करवाते समय उस पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क को तय करने में विवाद नहीं होंगे और इस मुद्दे पर होने वाले मुकदमों की संख्या घटेगी। उन्होंने बताया कि अब कोई भी व्यक्ति प्रदेश में कहीं भी कोई जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान आदि खरीदना चाहेगा तो सबसे पहले उसे संबंधित जिले के जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र देना होगा और साथ ही ट्रेजरी चालान के माध्यम से कोषागार में 100 रुपये का शुल्क जमा करना होगा। उसके बाद डीएम लेखपाल से उस भू-सम्पत्ति की डीएम सर्किल रेट के हिसाब से मौजूदा कीमत का मूल्यांकन करवाएंगे। उसके बाद उस सम्पत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क का भी लिखित निर्धारण होगा।

दरअसल प्रापर्टी खरीदने में अक्सर स्टांप चोरी की शिकायतें आती हैं। कई बार खरीददार वास्तव में प्रापर्टी की सही मायलित नहीं जानता है और वह विक्रेता या प्रापर्टी डीलर के बताए दाम पर खरीद लेता है। इस प्रक्त्रिस्या में स्टांप बचाने के लिए कीमतें कम-ज्यादा बताने का खेल चलता है। ऐसे मामलों में बहुत बार शिकायत होने पर मुकदमा हो जाता है और प्रापर्टी भी फंस जाती है। बड़े पैमाने पर ऐसे मुकदमे लंबित हैं। इसको देखते हुए नई व्यवस्था की गई है।
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अभी तक यह थी व्यवस्था
स्टांप मंत्री ने बताया कि अभी तक जो व्यवस्था चल रही थी उसमें कोई व्यक्ति भूमि, भवन खरीदना चाहता था तो उस भू-सम्पत्ति का मूल्य कितना है इस पर संशय बना रहता है और खरीददार प्रापर्टी डीलरए रजिस्ट्री करवाने वाले वकीलए रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी से सम्पर्क करता था और उसमें मौखिक तौर पर उस भवन या भूमि की कीमत तय हो जाती थी, उसी आधार पर उसकी रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क लगता था।

कम शुल्क वसूलने का विवाद होगा खत्म
बाद में विवाद की स्थिति पैदा होती थी कि उक्त भू-संपत्ति की कीमत इतनी नहीं बल्कि इतनी होनी चाहिए थीए इस लिहाज से इसकी रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क कम वसूला गया। प्रदेश के स्टाम्प व रजिस्ट्री विभाग में ऐसे मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही थी जिस पर अब अंकुश लगेगा।

पांच शहरों में पर्यटन विभाग का काम कराएंगे विकास प्राधिकरण

प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों की माली हालत सुधारने की दिशा में कदम उठाते हुए सरकार ने पर्यटन विभाग की परियोजनाओं के लिए विकास प्राधिकरणों को भी कार्यदायी संस्था नामित करने का फैसला लिया है। फिलहाल पांच शहरों में पर्यटन विभाग से संबंधित परियोजनाओं के लिए विकास प्राधिकरणों को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। इनमें अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और आगरा विकास प्राधिकरण शामिल हैं। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी दे दी गई है।

बता दे कि अब तक विकास प्राधिकरण अपनी ही आवासीय व व्यावसायिक परियोजनाओं के बल अपना खर्च निकालते हैं। लेकिन अधिकांश विकास प्राधिकरणों के पास न तो कोई आवासीय योजना है और न हीं कोई नया प्रोजेक्ट हैं। इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति डवांडोल है। ऐसे प्राधिकरणों को अपने आफिस का खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने राजकीय निर्माण निगम की तर्ज पर विकास प्राधिकरणों को भी कार्यदायी संस्था के तौर पर काम देने का फैसला किया है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी सरकार ने विकास प्राधिकरणों को कार्यदायी संस्था नामित करने जा रही है। 

दरअसल सरकार का मानना है कि इससे विकास प्राधिकरणों की माली हालत में जहां सुधार होगा, वहीं विकास की परियोजनाओं के तेजी से पूरा कराने में भी मदद मिलेगी। इसी कड़ी में फिलहाल पांच शहरों में पर्यटन विभाग का काम कराने के लिए अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और आगरा के विकास प्राधिकरणों को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। इसके अलावा यह भी फैसला किया गया है कि इन परियोजनाओं के लिए सेंटेज का निर्धारण, प्रत्येक परियोजना के लिए संबंधित विकास प्राधिकरण और पर्यटन विभाग के बीच आपसी सहमति से तय किया जाएगा।

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में अधिकारियों के पद बढ़े, अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक के नए पद सृजित

प्रदेश में उप खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा देने और अवैध खनन एवं परिवहन की रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार ने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में अधिकारियों के पदों में वृद्धि की है। सोमवार को आयोजित योगी कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म (क, ख समूह) प्रथम संशोधन सेवा नियमावली -2021 को मंजूरी दी है। जानकारी के मुताबिक विभाग में अतिरिक्त निदेशक का एक पद सृजित किया गया है। संयुक्त निदेशक का एक पद पहले से सृजित था, एक और पद सृजित किया गया है। वरिष्ठ खान अधिकारी के वर्तमान में पांच पद हैं, 10 और पद सृजित कर इनकी संख्या 15 की गई है। इसी प्रकार खान अधिकारी के 32 पद है, 20 पद बढ़ाकर इनकी संख्या 52 की गई है। 

एनएच 330 से अयोध्या एयरपोर्ट तक बनेगा फोरलेन रोड 

कैबिनेट ने अयोध्या-सुल्तानपुर मार्ग (एनएच-330) से एयरपोर्ट तक चार लेन सड़क निर्माण के लिए पीसीयू मानक में ढील देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की लागत 20.17 करोड़ रुपये आंकी गई है। अयोध्या में एनएच-330 के किमी-140 से दायीं ओर एक रास्ता एयरपोर्ट को जाता है। यहां नए मार्ग का निर्माण होना है। इसकी लंबाई डेढ़ किमी है। श्रीराम जन्मभूमि पर प्रस्तावित मंदिर के निर्माण हो जाने पर देश-विदेश से आने वाले वीआईपी और श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी। वर्तमान में इस मार्ग पर यातायात नहीं है। वहीं, चार लेन के सड़क के लिए पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) का न्यूनतम मानक 18,000 है। इसलिए इस मानक  को शिथिल किए जाने के लिए प्रस्ताव लाया गया था। यह मार्ग एयरपोर्ट के अलावा नवनिर्मित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज अयोध्या, सीआरपीएफ  कैंप, आरएएफ  कैंप और प्रस्तावित प्लास्टिक इंजीनियरिंग कॉलेज का मुख्य मार्ग होगा। इमरजेंसी सेवाओं के लिए मार्ग के इस्तेमाल के मद्देनजर भी इसका निर्माण अति आवश्यक है। वर्तमान में यह भूमि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन है।

एनएच 330 से अयोध्या एयरपोर्ट तक बनेगा फोरलेन रोड
कैबिनेट ने अयोध्या-सुल्तानपुर मार्ग (एनएच-330) से एयरपोर्ट तक चार लेन सड़क निर्माण के लिए पीसीयू मानक में ढील देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की लागत 20.17 करोड़ रुपये आंकी गई है। अयोध्या में एनएच-330 के किमी-140 से दायीं ओर एक रास्ता एयरपोर्ट को जाता है। यहां नए मार्ग का निर्माण होना है। इसकी लंबाई डेढ़ किमी है। श्रीराम जन्मभूमि पर प्रस्तावित मंदिर के निर्माण हो जाने पर देश-विदेश से आने वाले वीआईपी और श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी। वर्तमान में इस मार्ग पर यातायात नहीं है। वहीं, चार लेन के सड़क के लिए पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) का न्यूनतम मानक 18,000 है। इसलिए इस मानक  को शिथिल किए जाने के लिए प्रस्ताव लाया गया था। 

प्रयागराज में दो सेतुओं के लिए 284.21 करोड़ को मंजूरी
कैबिनेट ने प्रयागराज में जीटी रोड से एयरपोर्ट रोड के पास सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन पर फोरलेन रेल उपरिगामी सेतु और जीटी रोड जंक्शन पर चौफटका से कानपुर की तरफ  टू-लेन फ्लाईओवर के निर्माण के लिए व्यय वित्त समिति की अनुमोदित लागत 284.21 करोड़ को मंजूरी दे दी है। इन सेतुओं के बनने से यातायात में काफी सहूलियत होगी। 
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अयोध्या एवं अनूपशहर में बस स्टेशन निर्माण को हरी झंडी

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में  सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में अयोध्या तथा अनूपशहर में बस स्टेशनों के लिए निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव मंजूर कर लिए गए। परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने बताया कि अयोध्या में निर्माणाधीन सांस्कृतिक मंच के समीप स्थित बस स्टेशन के क्षमता विस्तार एवं निर्माण कार्य के लिए संस्कृति विभाग की भूमि परिवहन विभाग को निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया था। अयोध्या के गांव मांझा बरहटा की 3.6426 हेक्टेयर (9.0011 एकड़) संस्कृति विभाग की भूमि को परिवहन निगम को निशुल्क हस्तांतरित करने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया है। 

बस स्टेशन के विस्तार से अयोध्या में श्रद्धालुओं, पर्यटकों एवं यात्रियों के लिए बसों का संचालन सुगम और सुदृढ़ होगा। इससे परिवहन निगम को और अधिक राजस्व की प्राप्ति होगी। अयोध्या से गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया, प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, श्रावस्ती एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के लिए जनता को बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध होगी।

अनूपशहर के लोगों की पुरानी मांग हुई पूरी
अनूपशहर में लोग काफी दिनों से बस स्टेशन बनाए जाने की मांग कर रहे थे।  इसके निर्माण के लिए नगर पालिका परिषद अनूपशहर की भूमि गाटा संख्या 464/3 रकबा 0.481 हेक्टेयर में से रकबा 0.236 हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव भेजा गया है। यह भूमि राजस्व अभिलेखों में रास्ते के रूप में दर्ज है। इस जमीन को भी परिवहन विभाग के पक्ष में निशुल्क पुनर्ग्रहण, हस्तांतरण तथा प्रस्तावित प्रतिकर की धनराशि एवं पूंजीकृत मूल्य (वार्षिक किराया) की देयता में छूट प्रदान करने के प्रस्ताव को अनुमति प्रदान कर दी है। 
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