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गोंडाः ऋषि पाराशर की अष्टधातु की 40 करोड़ की मूर्ति एक बार फिर से चोरी

Tue, 09 Apr 2019 03:43 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला गोंडा
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पाराशर ऋषि आश्रम में जांच करती पुलिस व डाग स्कवॉयड - फोटो : amar ujala
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उमरीबेगमगंज (गोंडा) क्षेत्र के परास पट्टी मझवार गांव स्थित पराशर ऋषि के आश्रम से उनकी अष्टधातु की मूर्ति एक बार फिर चोरी हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस फोरेंसिक व डाग स्क्वॉयड ने काफी छानबीन की और ग्रामीणों से जानकारी ली।

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मूर्ति का वजन करीब 50 किलोग्राम के आसपास बताया जा रहा है जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 40 करोड़ आंकी जा रही है।गांव के बुजुर्गों के अनुसार मूर्ति की स्थापना आजादी से पहले सन 1906 में की गई थी। सेवानिवृत्त शिक्षक शिव बहादुर सिंह ने बताया कि उनके पिता और उनके साथियों ने मिलकर छह हजार चांदी के सिक्के देकर यह मूर्ति बनवाई थी।

उस समय इसका वजन करीब 80 किलोग्राम था। महर्षि पराशर की तपोस्थली पर मंदिर का निर्माण हुआ और मूर्ति स्थापना की गई।  रविवार रात एक बार फिर रविवार की रात अचानक मूर्ति फिर से चोरी होने की सूचना मिली तो हर कोई उधर ही चल पड़ा।
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मंदिर के दरवाजे पर लगा ताला तोड़कर चार मूर्ति ले जाने में सफल रहे। सूचना के बाद हरकत में आई पुलिस ने पुजारी बल्ली दास को हिरासत में ले लिया है और डाग स्क्वायड फोरेंसिक टीम को छानबीन के लिए बुलाया गया। फिलहाल अब तक कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लग सका। थाना अध्यक्ष जितेंद्र यादव ने बताया कि अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है।

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20 साल पहले भी हुई थी चोरी

मूर्ति चोरी होने के बाद लोगों की भीड़ जमा - फोटो : amar ujala
1997 में चोरों की नजरें इस बेशकीमती मूर्ति पर पड़ी और वह इसे उठा ले गए। करीब 20 वर्ष बाद पिछले साल अनिल सिंह के खेत की खुदाई के दौरान वही पुरानी महर्षि पराशर की अष्टधातु की मूर्ति बरामद हुई, लेकिन इस मूर्ति के हाथ और पैर नहीं मिले।

गांव वालों का कहना है कि शायद सैंपल के लिए चोर हाथ और पैर को काट ले गए थे। बाढ़ आ जाने के बाद चोर निकाल नहीं पाए और मूर्ति यही खेत में दबी रह गई।
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