मेट्रो रेल परियोजना के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड की सहमति मिलने से लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेश कुमार केशव अब तय समय सीमा में काम पूरा करने को लेकर आश्वस्त हैं। उनका कहना है कि यूरोपियन यूनियन बैंक 161 करोड़ रुपये (23 मिलियन यूरो) ऋण देगा। इसकी पहली किस्त इसी वित्तीय वर्ष में मिलेगी।
इससे अब केवल ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग ही नहीं है, बल्कि चारबाग से मुंशीपुलिया के बीच भी समय के भीतर मेट्रो दौड़ेगी। पूरे 23 किलोमीटर का काम तेजी पकड़ेगा। मार्च-2019 में मेट्रो रेल मुंशीपुलिया तक यात्रियों को पहुंचाएगी। जबकि, फरवरी-मार्च-2016 तक चारबाग से केडी सिंह बाबू स्टेडियम के बीच भूमिगत सेक्शन का निर्माण भी शुरू कर दिया जाएगा।
एलएमआरसी के अधिकारियों को पूरा भरोसा है कि, चारबाग से बसंतकुंज के लिए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को पीआईबी अपेक्षाकृत कम समय में मिल जाएगी।
एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव दिल्ली से पीआईबी की स्वीकृति लेकर लखनऊ देर शाम वापस आ गए हैं। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अब नाउम्मीदी दूर हो चुकी है।
एक अनुमोदन से पूरी परियोजना की गति में कई गुना का अंतर पड़ रहा है। इसमें निर्माण, आर्थिक मदद, केंद्रीय अंशदान, टेंडरिंग, नए प्रोजेक्ट और भविष्य की प्रगति सभी बिंदुओं के लिए एक पीआईबी ही सकारात्मक संदेश लेकर आई है।
पहले आठ किमी. नहीं, अब पूरे कॉरिडोर पर नजर
एलएमआरसी मेट्रो के पहले आठ किलोमीटर को लेकर तो पहले से ही आश्वस्त था। बिना पीआईबी के भी प्राइमरी सेक्शन को पूरा करने में सक्षम था। अब पीआईबी की हरी झंडी के बाद उसकी नजर पूरे कॉरिडोर पर है।
23 किलोमीटर के इस सेक्शन में चारबाग से केडी सिंह बाबू स्टेडियम के भूमिगत सेक्शन को लेकर कांस्पेचुअल डिजाइनिंग का काम हो रहा है। इसके आधार पर भविष्य में सिविल टेंडर होगा।
फरवरी तक इसका निर्माण शुरू होगा। तीन साल में ये काम पूरा होगा। इसके साथ ही केडी सिंह बाबू स्टेडियम से मुंशीपुलिया के बीच मेट्रो निर्माण का काम होगा। दोनों काम मिला कर पूरा कॉरिडोर मार्च-2019 तक संचालित होने लगेगा।
दूर हुआ आर्थिक संकट
एलएमआरसी को पीआईबी अनुमोदन के पूरे पेपर मिलने में करीब दो महीने का लग जाएंगे। इसके बाद यूरोपियन यूनियन बैंक के साथ एलएमआरसी का एग्रीमेंट होगा। इस एग्रीमेंट के आधार पर 161 करोड़ रुपये की मदद इसी वित्तीय वर्ष में मिलने की उम्मीद है।
जबकि, अगले वित्तीय वर्षों में जब बहुत अधिक धन की आवश्यकता होगी तब किस्तें और बड़ी होती जाएंगी। इस तरह से एलएमआरसी के लिए अब भविष्य में कोई भी आर्थिक संकट नहीं रहेगा।
चारबाग से बसंतकुंज की मुश्किलें भी दूर
नार्थ-साउथ कॉरिडोर के बाद चारबाग से बसंतकुंज के बीच ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर में भी अलग से पीआईबी स्वीकृति एलएमआरसी को लेनी पड़ेगी। मगर एक कॉरिडोर के लिए स्वीकृति मिलने के बाद एलएमआरसी के लिए अब दूसरा एप्रूवल लेना कोई मुश्किल काम नहीं होगा। एलएमआरसी का प्रजेंटेशन शानदार रहा।
उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में और बेहतर प्रस्तुतीकरण होगा। जबकि, पीआईबी का भरोसा भी लखनऊ के प्रोजेक्ट में और अधिक बढ़ जाएगा।
लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव के अनुसार, हमारी लंबी कोशिशों का सकारात्मक परिणाम है। पीआईबी मिलने के बाद हमको प्रसार करने में अब कोई दिक्कत नहीं होगी। तय समयसीमा के भीतर ही हम राजधानी को मेट्रो की सौगात देंगे।
यूरोपियन यूनियन बैंक से हमारा लोन एग्रीमेंट बहुत जल्द ही साइन होगा। इसी वित्तीय वर्ष में ही 23 मिलियन यूरो का ऋण मिल जाएगा। बहुत जल्द चारबाग से बसंतकुंज के बीच भी कागजी काम शुरू कर दिया जाएगा।