फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुशखबरी: 51 हजार परिवारों को मिलेगा आशियाना

Sat, 22 Aug 2015 05:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
एलडीए ने पुनरीक्षित क्षेत्र के 197 गांवों में से कुछ में करीब 750 एकड़ (250 हेक्टयेर) भूमि अर्जित करने की प्लानिंग शुरू की है। इस भूमि पर भविष्य में 50 हजार परिवार बसाए जाएंगे। इसको लेकर विशेषज्ञ फर्म को सितंबर में जिम्मेदारी दी जाएगी। ये फर्म इन गांवों में जमीन की कीमत, भूमि पर हुए  निर्माणों की लागत वगैरह का आंकलन कर एलडीए को रिपोर्ट देगा। इसके बाद अर्जन संबंधित धाराएं लागू की जाएंगी।
विज्ञापन


लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अर्जन विभाग के अभियंताओं ने शुरुआती सर्वे के बाद एक कंसलटेंट चुनने का फैसला किया है। 22 अगस्त के बाद कंसलटेंट का चुनाव कर लिया जाएगा। यह कंसलटेट  चुनी हुई 750 एकड़ भूमि का सर्वे करेगा। इसमें आकलन किया जाएगा कि योजना पर एलडीए को कितने मुआवजे का भुगतान करना पड़ेगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

एक चौथाई जमीन पर बनेंगे मकान
एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि 750 एकड़ भूमि में करीब 25 फीसदी भूमि का इस्तेमाल रिहायशी होगा। एलएडी यहां ग्रुप हाउसिंग करेगा, जिनमें कम से कम 50 हजार परिवारोंको बसाया जाएगा। हालांकि अभी यह केवल प्राधिकरण का अनुमान है। बाकी भूमि रिक्रिएशनल,  कॉमर्शियल, सड़क, सामुदायिक, ग्रीन बेल्ट और संस्थागत आदि के लिए  इस्तेमाल होगी। मुआवजा होने के बाद इस भूमि की प्लानिंग शुरू करवाई जाएगी।
विज्ञापन

दो योजनाएं पहले से ही फंसी

प्रबंध नगर में नहीं खुल रही लाखों के आशियाने की राह
प्रबंध नगर के किसानों को नई अर्जन नीति के तहत मुआवजा देने का फैसला एलडीए ने कर लिया है। ये फैसला पिछले साल ही कर लिया गया था, लेकिन एलडीए के अधिकारी किसानों के बीच नहीं पहुंचे। इससे आईआईएम रोड की प्रबंध नगर स्कीम में लाखों लोगों के लिए आशियाने की राह अब तक नहीं खुल सकी है। यहां 840 हेक्टयेर (करीब 2050 एकड़) भूमि है।

इसके बावजूद करीब एक साल पहले एलडीए इस भूमि को ग्रीन लैंड बताकर अर्जन से छोड़ने की तैयारी कर रहा था। जबकि यहां जगह जगह ऊंची-ऊंची इमारतें बनी हुई हैं। वहीं कई एकड़ जमीन किसानों से खरीद कर भूमाफिया अपने कब्जे में ले चुके हैं। अब यह वास्तविकता एलडीए के ही अर्जन के कागजों से निकल कर सामने आ रही है कि यहां केवल फेज-1 (650 एकड़) की 70 फीसदी भूमि ही ग्रीन है। बाकी फेज-2 और फेज-3 (1400 एकड़) की सारी जमीन रिहायशी लैंडयूज वाली ही है।

मोहान रोड आवासीय योजना पर संकट
मोहान रोड पर 668  एकड़ (200 हेक्टेयर) भूमि में किसानों से मुआवजा तय करने में देरी भारी पड़ेगी। यहां एलडीए करीब 40 हजार लोगों को आवास देना चाहता है। भूमि अधिग्रहण के लिए यहां धारा-4 और 6 तामील की जा चुकी है। प्यारेपुर और कलियाखेड़ा गांव के किसानों को इसके नोटिस  भी भेजे जा चुके हैं। यहां करीब 1600 किसानों की जमीन लेनी है।

अगर कुछ माह में मुआवजा का मसला फाइनल नहीं हुआ तो यह क्षेत्र अर्जन की धाराओं से मुक्त हो जाएगा। इस योजना के लिए डेडलाइन दिसंबर में खत्म हो रही है। ऐसे में अगले कुछ महीने में अगर किसानों को मुआवजा देना शुरू नहीं किया गया तो आवासीय योजना खत्म हो जाएगी। माना जा रहा है कि प्लाटिंग कर रहे भूमाफिया के दबाव में यहां भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है। उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह ने अर्जन विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश दिया है, जिससे योजना लैप्स न हो।

इस पर  एलडीए के उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि एलडीए लगातार किसानों के साथ बातचीत कर रहा है। भूमि अर्जन को लेकर 197 गांवों में नई कोशिशें शुरू की जा रही हैं। इसको लेकर एक कंसलटेंट चुना जाएगा। जबकि, पुरानी फंसी हुई स्कीमों को भी जल्द क्लीयर कराएंगे।

एलडीए की तर्ज पर नगर निगम बनाएगा 1100 मकान

एलडीए और आवास विकास परिषद की तरह अब नगर निगम भी बहुमंजिला फ्लैट और डुप्लेक्स मकान बनाएगा। ये निर्माण पारा में और रायबरेली रोड पर ओमेक्स सिटी के पास मौजूद जमीनों पर होंगे। योजना के तहत करीब 1100 फ्लैट और डुप्लेक्स मकान बनाए जाएंगे। नगर निगम ने इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि इन फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन निर्माण शुरू होने केबाद ही खोला जाएगा।

रिहाइशी साइट विकसित करने के लिए नगर निगम ने रायबेरली रोड पर ओमेक्स सिटी केपास अशर्फाबाद खालसा में अपनी जमीन को चुना है। यहां पांच क्लस्टर  में 10 टॉवर बनाए जाएंगे। इनमें पांच टॉवर आठ मंजिला, चार टॉवर तीन मंजिला, एक टॉवर एचआईजी वर्ग में दो मंजिला होगा। इस तरह निगम यहां करीब 610 फ्लैट तैयार करेगा।

पारा में दो साइट पर काम होना है। इसके लिए गाटा संख्या 2853 और 2830 पर भवन निर्माण होगा। गाटा संख्या 2830 में पांच ब्लॉकों में कुल 336 फ्लैट बनाए जाएंगे। दूसरी साइट गाटा संख्या 2853 पर 112 फ्लैट बनाए जाने हैं। इनमें जमीन की उपलब्धता और मांग के आधार पर डुप्लेक्स मकान भी शामिल हैं। इसमें से 20 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग केलिए रहेंगे।
विज्ञापन

पहले निर्माण, फिर रजिस्ट्रेशन

नगर निगम मुख्य वास्तुविद् एसके जैन का कहना है कि एलडीए और आवास विकास परिषद में सूचीबद्ध बिल्डरों और डवलपर्स का चयन किया जाएगा, ताकि मकानों की गुणवत्ता बनी रहे। इसके अलावा निर्माण शुरू होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन  प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे निगम योजना पर क्रियान्वयन प्रभावी तरीके से करा सकेगा। साइट पर कम्युनिटी सेंटर, पार्क, कॉमर्शियल  कार्य के लिए  भी जगह विकसित की जाएंगी।

थ्री-बीएचके तक के होंगे मकान
दोनों साइटों पर निर्माण केलिए नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी फाइनेंशियल बिड खोली जा चुकी है। इसके बाद अब टेक्निकल बिड खुलनी है। इस काम को इसी महीने के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। फ्लैटों की कीमत का फैसला भी टेंडर प्रक्रिया पूरा होने के बाद होगा।

नगर निगम के मुख्य वास्तुविद् एसके जैन का कहना है कि हमारी कोशिश है कि पारा और रायबरेली रोड पर रिहाइशी कॉलोनियों की योजना को गुणवत्ता और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। निर्माण शुरू होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन  खोले जाएंगे। इसमें करीब 12 महीने तक लग सकते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें