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कोतवाली से गायब हो गया पकड़ा गया 13 बोरी गांजा, हाईकोर्ट ने कहा- पता करो, कहां गया

Mon, 24 Sep 2018 10:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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एसटीएफ ने तीन साल पहले झारखंड से आ रहे एक ट्रक में 13 बोरी गांजा पकड़ा और उसे वहीं की कोतवाली के मालखाने में केस प्रॉपर्टी के रूप में रखवा दिया।

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जुलाई 2018 में ट्रॉयल कोर्ट में साक्ष्य पेश करने की बारी आई तो पता चला कि पूरा 13 बोगी गांजा गायब हो चुका है। वहां तैनात पुलिस अफसरों के पास कोई जवाब नहीं कि यह गांजा कहां गया?

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए प्रतापगढ़ एसएसपी को सख्त निर्देश दिया कि दोषी अफसरों की वरिष्ठता की परवाह किए बिना सीओ स्तर के अधिकारी से मामले की पूरी जांच करवाएं।
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जांच की निगरानी खुद करें। पुलिस के ऐसे रवैये से केस प्रॉपर्टी गायब होगी तो न्याय प्रदान करनी की प्रक्रिया में बाधा आएगी।

'पुलिस की निगहबानी से केस प्रॉपर्टी गायब हुई, कड़े निर्देश तो देने ही पड़ेंगे'

प्रतापगढ़ में कोतवाली के मालखाने से 13 बोरी गांजा गायब होने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा कि पुलिस की निगहबानी से केस प्रॉपर्टी गायब हुई है। कड़े निर्देश तो देने ही पड़ेंगे। प्रतापगढ़ एसएसपी दोषी अधिकारियों की वरिष्ठता की परवाह न करते हुए कम से कम सीओ स्तर के अधिकारी से मामले की विस्तृत जांच करवाएं। इन निर्देशों की प्रति प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को भी भेजी जाए ताकि वे पुलिस मालखानों में केस प्रॉपर्टी के रखरखाव के हालात जान सकें। वे उचित कार्रवाई करें ताकि पुलिस के खराब आचरण से न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया में बाधा न आए।

प्रतापगढ़ में एसटीएफ ने 16 दिसंबर 2015 को झारखंड से आ रहे एक ट्रक में 13 बोरी गांजा पकड़ा। यह गांजा वहीं की कोतवाली के मालखाने में केस प्रॉपर्टी के रूप में रखवाया गया ताकि कोर्ट में मुकदमा चले तो इसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। बाद में गांजा वहां से गायब हो गया।

इस मामले में कोतवाली के एसएचओ हरपाल सिंह और मालखाने के प्रभारी मोहर्रिर मनफूल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उन्हें गांजा वापस लाने के लिए कहा गया था। वे गांजा वापस नहीं कर पाए। मनफूल सिंह और हरपाल सिंह का कहना है कि दिसंबर 2015 से अब तक यहां नौ एसएचओ बदल गए हैं। वहीं केस चलने के दौरान ही मनफूल रिटायर हो चुका है, हालांकि अभी उसने अगले प्रभारी को चार्ज नहीं दिया है। एसएचओ हरपाल सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा है कि इस मामले में उनके खिलाफ दायर एफआईआर खारिज की जानी चाहिए।
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गांजा गायब होने की सूचना क्यों नहीं दर्ज करवाई

जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस संजय हरकौली ने याचिका को सुनने के बाद कहा कि एनडीपीएस एक्ट में जब्त किया गया गांजा पुलिस स्टेशन से गायब हो चुका है। एसएचओ इस पुलिस स्टेशन को नियंत्रित करते हैं। मालखाना भी उनके अधीन है। यह उनकी ड्यूटी थी कि वे मालखाने में रखे हुए सामान की नियमित जांच करते रहें। इस मामले में हरपाल सिंह की भूमिका को खारिज नहीं किया जा सकता। यह भी देखने की जरूरत है कि किस समय गांजा गायब हुआ? किसने इसकी सूचना नहीं दी? बाद के एसएचओ ने भी गांजा गायब होने की सूचना क्यों नहीं दर्ज करवाई? इन सभी हालात में याचिका खारिज की जाती है। हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे निर्देश इसलिए देने पड़ रहे हैं क्योंकि केस प्रॉपर्टी के रूप में रखा गांजा पुलिस मालखाने से ही गायब हो गया है।

ऐसा होता रहा तो अपराधियों को फायदा मिलेगा
हाईकोर्ट ने कहा कि मालखाने में और भी बहुत चीजें रखी जाती हैं, जो केस से जुड़ी होती हैं। इन्हें बिगाड़ा जा सकता है, गायब किया जा सकता है, इनका स्वरूप बदला जा सकता है। अगर केस प्रॉपर्टी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं होगी तो अपराधियों को इसका फायदा मिलेगा।
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