नोटबंदी के बाद दिल्ली के करोल बाग स्थित बसपा के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट में 104 करोड़ के पुराने नोट जमा होने के संबंध में हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को तीन महीने में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
बता दें कि बसपा के अकाउंट में ये राशि नोटबंदी के बा द 02 दिसंबर से 09 दिसंबर के बीच जमा हुई थी। इस संबंध में दायर की गई जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुनवाई के बाद ये फैसला दिया।
यह आदेश जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने याचिकाकर्ता प्रताप चन्द्र की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर तथा निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता मनीष माथुर को सुनने के बाद दिया।
बहुजन समाज पार्टी द्वारा नोटबंदी के बाद दिल्ली के करोल बाग़ स्थित यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के अपने पार्टी अकाउंट में 02 दिसंबर से 09 दिसंबर 2016 के बीच 104 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराये जाने के सम्बन्ध में दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने निर्वाचन आयोग को तीन माह में निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
नोटबंदी के निर्देशोंं का किया उल्लंघन
बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : amar ujala
यह आदेश जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने याचिकाकर्ता प्रताप चन्द्र की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर तथा निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता मनीष माथुर को सुनने के बाद दिया।
नूतन ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि नियम के मुताबिक, कोई भी राजनैतिक दल उन्हें चंदे में प्राप्त नकद धनराशि को प्राप्ति के 10 कार्यकारी दिवस के अन्दर पार्टी के बैंक अकाउंट में अवश्य ही जमा करा देगा।
इन निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी पार्टी ने इन निर्देशों का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ निर्वाचन चिन्ह (आरक्षण एवं बटाई) आर्डर 1968 के प्रस्तर 16ए में पार्टी की मान्यता रद्द करने सहित तमाम कार्यवाही की जा सकती है।
चूँकि नोटबंदी का आदेश 08 नवम्बर को आया था, अतः इन निर्देशों के अनुसार अधिकतम 20 नवम्बर तक नकद धनराशि बैंक खाते में जमा कर देना चाहिए था पर बसपा ने 2 दिसंबर के बाद 104 करोड़ रुपये जमा कराये, जो सीधे-सीधे इन निर्देशों का उल्लंघन है।
निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता मनीष माथुर ने कहा कि आयोग को प्रताप चंद्रा की शिकायत मिल गयी है पर विधान सभा चुनाव कराने की व्यवस्तता के कारण उसे इस पर निर्णय के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। कोर्ट ने इन तथ्यों को सुनने के बाद इस शिकायत पर तीन महीने में कार्यवाही करने के आदेश देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया।