बाबरी मस्जिद केस के मुद्दई हाशिम अंसारी ने मुफ्ती मोहम्मद इलियास द्वारा भगवान शंकर को पहला पैगंबर बताने के बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि इस तरह का बयान देने वाला मुफ्ती नहीं हो सकता।
उन्होंने जमीयत उलेमा पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि मुसलमान जमीयत उलेमा को नहीं मानता है। हाशिम अंसारी ने कहा कि हम एकता की बात करते हैं।
ये मौलवी एक तरफ लड़ाते हैं, दूसरी तरफ एकता की बात करते हैं। सारी दुनिया जानती है कि हर इंसान आदम की औलाद है। जब बाबरी मस्जिद में मूर्ति रखी तो ये मौलवी कहां थे।
जो मौलवी ये बयान दे रहा कि शंकर हमारे पहले पैगंबर है, वह हिंदू-हिंदुस्तान के मायने नहीं जानता। इलियास किस दारुल उलूम का पढ़ा लिखा है? आज तमाम मौलाना दारुल उलूम खोले हैं।
उनके पास किस दारुल उलूम का डिप्लोमा है। मौलवी झूठ बोलता है। हाशिम ने कहा वह बलरामपुर के कार्यक्रम में वे शामिल नहीं होंगे। ये मुफ्ती नहीं हैं, यह मुफ्त के खाने वाले हैं।