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Women's Mental Treatment Guideline: यूपी में बनेगी महिलाओं के मानसिक उपचार की गाइडलाइन, केजीएमयू मानसिक रोग विभाग की टीम कर रही अध्ययन

Mon, 30 May 2022 03:30 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के मानसिक उपचार को लेकर गाइडलाइन तैयार होगी। केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग ने प्रदेश की महिलाओं की मानसिक स्थिति को लेकर अध्ययन शुरू किया है। मथुरा, मध्य में रायबरेली, बुंदेलखंड में बांदा और पूरब में आजमगढ़ को अध्ययन का केंद्र बनाया गया है। 
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kgmu - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में महिलाओं के मानसिक उपचार को लेकर गाइडलाइन तैयार होगी। इसके लिए प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से से एक-एक हजार महिलाओं पर अध्ययन किया किया जा रहा है। अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश में महिला स्वास्थ्य की स्थिति को समझा जाएगा और उसी हिसाब से गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

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महिला आयोग के सहयोग से केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग ने प्रदेश की महिलाओं की मानसिक स्थिति को लेकर अध्ययन शुरू किया है। पश्चिम में मथुरा, मध्य में रायबरेली, बुंदेलखंड में बांदा और पूरब में आजमगढ़ को अध्ययन का केंद्र बनाया गया है। इस क्षेत्र के आसपास की एक-एक हजार महिलाओं की मानसिक स्थिति को लेकर अध्ययन होगा।

इसके लिए महिलाओं में शारीरिक विकार, मानसिक स्थिति, घरेलू हिंसा आदि का स्कोर तैयार किया जाएगा। फिर उसी हिसाब से संबंधित क्षेत्र में महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उपचार केंद्र खोले जाएंगे। अध्ययन टीम का नेतृत्व केजीएमयू के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष प्रो. विवेक अग्रवाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के हर हिस्से में अलग-अलग रहन सहन, खानपान और जीवन शैली है। महिलाओं की मानसिक स्थिति पर इसका काफी असर पड़ता है। यही वजह है कि प्रदेश को चार हिस्सों में बांट कर अध्ययन किया जा रहा है।
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अध्ययन में हर पहलू का रखा जाएगा ध्यान: प्रो. अग्रवाल
विशेषज्ञों के मुताबिक पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में मानसिक विकार करीब 11 फीसदी ज्यादा होते हैं। एक अनुमान के हिसाब से प्रदेश की 41.9 फीसदी महिलाएं अवसाद ग्रस्त हैं। केजीएमयू के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष प्रो. विवेक अग्रवाल बताते हैं कि प्रजनन के बाद हार्मोन में होने वाले बदलाव से महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में हर पहलू का ध्यान रखा जाएगा। उनमें मासिक चक्र में होने वाले परिवर्तन से चिड़िचिड़ापन, बेचैनी, चिंता, तनाव, माइग्रेन, नींद में गड़बड़ी, उदासी, एकाग्रता की कमी जैसे लक्षण सामने आते हैं। देर से गर्भावस्था और प्रसव के बाद मानसिक समस्या ज्यादा होती है। अध्ययन में किशोरावस्था में आए बदलाव, गर्भावस्था एवं प्रसूति, स्तनपान, संतान का पालन एवं भरण पोषण, परिवार के बुजुर्गों की देखभाल, कार्यस्थल पर उत्पीड़न आदि का भी आकलन किया जाएगा। अलग-अलग तरह के मानसिक विकार बढ़ाने वाले कारणों को चिह्नित किया जा रहा। फिर इन्हीं कारणों के आधार पर गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

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