चारबाग जीआरपी प्रभारी ने बताया कि 35 दिन बाद अजय का फोन ऑन हुआ। उसकी लोकेशन हरिद्वार मिली। वहां जीआरपी की टीम उसी महिला रेशमा के घर पहुंची, जिसे अजय ने बच्चा देखे रहने के लिए कहा था। रेशमा घरों में कामकाज करती है।
महिला ने बताया कि वह मुरादाबाद स्टेशन पर उतर गई थी। जहां से बच्चे व मोबाइल को लेकर बस से हरिद्वार पहुंची। उसने हरिद्वार पुलिस को जानकारी दी, पर पुलिस ने उसे झिड़ककर जीआरपी जाने को कहा। वह घर आकर बच्चों के साथ अजय के बेटे का भी पालन-पोषण करने लगी। इस बीच वह तीन बार थाने गई, पर कोई जानकारी नहीं मिली।
35 दिन बाद उसने अजय का फोन ऑन किया तो सर्विलांस ने उसे तलाशा। रेशमा ने बच्चे को हाथ जोड़ना, पूजा वगैरह भी सिखाने का प्रयास किया। बच्चे की बरामदगी में विवेचना कर रहे उपनिरीक्षक उद्यम सिंह तालान, उपनिरीक्षक मोहित कुमार, कांस्टेबल सुशील कुमार, अतुल शुक्ला की भूमिका सराहनीय रही।