प्रदेश में नगरीय निकाय सीमा में शामिल की गईं ग्राम पंचायतों के कारण बेरोजगार हुए 700 से अधिक ग्राम रोजगार सेवकों को अन्य ग्राम पंचायतों में रिक्त पदों पर समायोजित किया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने जिलाधिकारियों को ग्राम पंचायत की सहमति से समायोजन कराने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगमों के सीमा विस्तार और नए नगरीय निकाय गठित होने से बेरोजगार हुए ग्राम रोजगार सहायक लंबे समय से समायोजन की मांग कर रहे थे। उधर, प्रदेश की 58 हजार 769 ग्राम पंचायतों में से 35620 ग्राम पंचायतों में ही ग्राम रोजगार सेवक कार्यरत हैं।
हापुड़, शामली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर में एक भी ग्राम रोजगार सेवक नहीं है जबकि बागपत में एक ग्राम रोजगार सेवक कार्यरत हैं। अपर मुख्य सचिव के अनुसार, पद रिक्त होने और मनरेगा में काम बढ़ने से कामकाज में काफी दिक्कतें होती हैं। बेरोजगार हुए 700 ग्राम रोजगार सेवकों को उसी जिले की ग्राम पंचायतों में रिक्त पदों पर समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। रोजगार सेवक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश कुमार सिंह ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अपर मुख्य सचिव का आभार जताया है।