प्रदेश में मंडी शुल्क घटाकर एक फीसदी करने की तैयारी है। कुछ समय पहले मंडी परिषद बोर्ड ने मंडी शुल्क 1.5 फीसदी करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। वहीं, सरकार इसे न्यूनतम स्तर पर लाना चाहती है। इससे कारोबारियों को सीधा फायदा होगा और किसानों को अपनी उपज का वाजिब दाम मिलेगा।
केंद्र सरकार ने मंडी के बाहर व्यापार करने पर मंडी शुल्क समाप्त कर दिया है। वर्तमान में मंडी समिति परिसर में व्यापार करने पर 2 प्रतिशत मंडी शुल्क और 0.5 प्रतिशत विकास शुल्क देना होता है। मंडी परिषद बोर्ड ने विकास शुल्क यथावत रखते हुए मंडी शुल्क 1.5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को पास कर दिया है, लेकिन अभी शासन की अंतिम मुहर बाकी है।
मंडी एक्ट के मुताबिक, मंडी शुल्क को एक प्रतिशत किया जा सकता है। इससे कम करने के लिए मंडी एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार वर्तमान में लागू मंडी एक्ट के दायरे में ही मंडी शुल्क को घटाकर एक फीसदी के न्यूनतम स्तर पर लाना चाहती है। इससे मंडी परिसरों में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि, विकास शुल्क 0.5 फीसदी ही रहेगा। इस संबंध में इसी माह शासनादेश जारी हो सकता है।