राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि अगर नगर विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री आजम खां को राजभवन आने में डर लगता है तो सरकार को उन्हें और सुरक्षा देनी चाहिए।
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राजभवन क्या, पूरा यूपी उन्हें सुरक्षित रखेगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आजम यूपी से बाहर भी जाएं तो बता दें, गृहमंत्री से कहकर उनकी सुरक्षा का इंतजाम करा देंगे।
बतौर राज्यपाल दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने की पूर्व संध्या पर राजभवन में बृहस्पतिवार को ‘राजभवन में राम नाईक 2015-16’ का विमोचन करने के बाद पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने ये बातें कहीं।
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राजभवन आने में डर लगने की बात कहते हुए आजम खां द्वारा उत्तर प्रदेश नगरपालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड के नवनियुक्त सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न होने के सवाल पर नाईक ने कहा कि बोर्ड के महत्व को देखते हुए उन्होंने पहली बार राजभवन में आयोजन रखा था। मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्री को आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री ने तो फोन करके अपरिहार्य कारणों से न पहुंच पाने की जानकारी दे दी लेकिन आजम को बताने का भी समय नहीं मिला। अगर उन्हें राजभवन आने में इतना ही डर लगता है तो मुख्यमंत्री को बताना चाहिए और सरकार को उन्हें और सुरक्षा देनी चाहिए।
संघीय ढांचे में राज्यपाल की भूमिका अहम
हाल ही दिल्ली में प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई मुख्यमंत्रियों की बैठक में कुछ मुख्यमंत्रियों द्वारा राज्यपाल का पद समाप्त करने की मांग उठाए जाने के सवाल पर नाईक ने कहा कि चूंकि यह मामला राष्ट्रपति, राज्यपाल से संबंधित है और सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है, इसलिए इस पर कुछ कहना उनकी परिधि से बाहर है।
बोले, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश का मामला उनके लिए सबक है। यूपी में ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसकी वे कोशिश करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे में राज्यपाल की अहम भूमिका व उपयोगिता है।
वह केंद्र व राज्य के बीच सेतु का काम करता है। किन्हीं एक-दो मामलों के आधार पर यह कहना ठीक नहीं है कि राज्यपाल का पद समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
मायावती पर दयाशंकर की टिप्पणी निंदनीय
भाजपा नेता दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा सुप्रीमो मायावती पर की गई टिप्पणी को निंदनीय करार देते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऐसा वक्तव्य किसी सभ्य आदमी को नहीं देना चाहिए। खास तौर पर महिलाओं के बारे में तो कतई नहीं।
'जब मुझे लोकप्रिय कहा जाता है तो अच्छा लगता है'
हमेशा सुर्खियों में बने रहने के सवाल पर नाईक ने कहा, मैं जमीन से उठकर यहां तक पहुंचा हूं। मुझे लोगों से मिलना, बातें करना, उनकी समस्याएं सुलझाना अच्छा लगता है। मुझे लोकप्रिय कहा जाता है तो अच्छा लगता है।
जहां तक पार्टी विशेष के राज्यपाल का आरोप है तो कोई राजनीतिक पहलू हो तो इसका जवाब दे सकते हैं। चाहे लोकायुक्त चयन का मामला हो या विधान परिषद में मनोनयन का, जो संविधान सम्मत था, वही किया।
संजय सेठ को फायदा हुआ
राज्यपाल ने कहा कि संविधान के अनुसार उनके काम करने का फायदा संजय सेठ को हुआ। कुछ ऐसी जानकारियां मिली थीं जिनके आधार पर विधान परिषद में उनके मनोनयन को मंजूरी नहीं दी। वे राज्यसभा में पहुंच गए। सपा के कोषाध्यक्ष बन गए।
हवाई दौरों को लेकर सवाल पर नाईक ने कहा कि इससे समय बचता है जिससे दूसरे काम कर सकते हैं। अगर सड़क मार्ग से जाएं तो सुरक्षा के लिए फोर्स लगानी पड़ेगी। समय भी ज्यादा लगेगा।
अवैध शराब से मौतों की जानकारी केंद्र को देंगे
नाईक ने कहा कि वे केंद्र को महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्ट भेजते हैं। एटा में अवैध शराब से मौतें भी गंभीर मामला है। इसकी भी जानकारी केंद्र को देंगे। दो साल में उन्होंने केवल एक ही विशेष रिपोर्ट केंद्र को भेजी है।
मथुरा, कैराना व दादरी की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिहाज से गंभीर हैं जिस पर उन्होंने राष्ट्रपति व केंद्र को विशेष रिपोर्ट भेजी है और उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री से मिलकर अवगत भी कराया है।