चंडीगढ़ से देवरिया पत्नी व बच्चों के साथ जा रहे मनीष तिवारी ने बताया कि जब तक प्रशासन मौके पर पहुंचा तब ग्रामीणों ने उनके साथ परिजनों को बाहर निकाला है। चंडीगढ़ से बिहार के नौगछिया जा रही पूनम देवी ने बताया कि मामूली चोटें आई हैं। ग्रामीणों के सहयोग से उन्हें बाहर निकाला जा सका है। यात्रियों ने ग्रामीणों का आभार जताया है। मोतीगंज और मनकापुर एसओ के साथ डीएम नेहा शर्मा सबसे पहले मौके पर पहुंचीं। इसके पांच मिनट में एसपी विनीत जायसवाल, सीओ सदर शिल्पा वर्मा समेत अन्य अधिकारी भी पहुंचे। इस दौरान ग्रामीण युद्ध स्तर पर यात्रियों को बाहर निकालने में जुटे रहे। भीषण गर्मी के चलते पानी समेत अन्य जरूरी इंतजाम भी कराया है।
मोतीगंज थाना क्षेत्र के पिकौरा गांव के पास हुए रेल हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य के लिए सात स्वास्थ्य टीमें मौके पर पहुंचीं। घटना स्थल पर ही प्रारंभिक उपचार के बाद घायलों को मनकापुर सीएचसी पहुंचाया गया। वहां मुस्तैद टीम ने तत्काल उपचार शुरू कर दिया। वहां से गंभीर घायलों को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया।
मनकापुर सीएचसी पर सीएचसी वजीरगंज, नवाबगंज, काजीदेवर, छपिया व मेडिकल कॉलेज की दो टीमों को लगाया गया। प्रत्येक टीम में दो डॉक्टर व पांच स्वास्थ्यकर्मी रहे। बभनजोत व सीएमओ कंट्रोल रूम की टीम को रिजर्व में रखा गया। वहीं घटना स्थल पर 42 एंबुलेंस के साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों को विभिन्न अस्पतालों तक पहुंचाया। प्रत्येक एंबुलेंस में दो से तीन घायल रहे। दुर्घटना की सूचना मिलते ही सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने पहुंचकर घायलों की जान बचाने के लिए रक्तदान किया। लॉयंस क्लब गोंडा, भारतीय जनता पार्टी, इंकलाब फाउंडेशन व रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से रक्तदान किया गया। रक्तदान करने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. चेतन पराशर ने बताया कि दुर्घटना के समय ब्लड बैंक में मात्र 23 यूनिट खून बचा था। रक्तदाताओं के सहयोग से घायलों की जान बचाने में मदद मिलेगी।