लोहिया इंस्टीटयूट में अब टीबी का इलाज होगा मुफ्त।
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अब डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भी टीबी एमडीआर का निशुल्क इलाज किया जाएगा। उत्तर प्रदेश स्टेट टास्क फोर्स (टीबी उन्मूलन) की संस्थान प्रशासन के साथ हुई बैठक में यह तय किया गया। यह फैसला वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य के तहत लिया गया है।
उत्तर प्रदेश स्टेट टास्क फोर्स (टीबी उन्मूलन) के चेयरमैन डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि प्रदेश में 53 मेडिकल कॉलेज नेशनल ट्यूबरकुलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) से जुड़े हैं
जो टीबी उन्मूलन के लिए रोगियों के उपचार शोध शिक्षण एवं प्रशिक्षण के लिए कार्यरत हैं। प्रदेश में एमडीआर टीबी के इलाज के लिए 22 केंद्र हैं।
इन केंद्रों को प्रशिक्षित करने का काम केजीएमयू का रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभाग करता है। भारत सरकार टीबी के मरीज के पोषण के लिए हर माह 500 रुपये की सहायता राशि भी दे रही है।
यह राशि निजी क्षेत्र में इलाज कराने वाले मरीजों, चिकित्सकों एवं अस्पतालों को भी मिल रही है। टीबी का इलाज सरकारी अस्पताल में बिल्कुल मुफ्त किया जाता है। पहले इलाज इंजेक्शन लगाकर होता था, अब इसकी दवाएं उपलब्ध हैं।
अभी तक लोहिया संस्थान में यह सुविधा नहीं थी, लेकिन अब यहां भी टीबी के निशुल्क इलाज की सुविधा होगी। बैठक में लोहिया संस्थान की निदेशक डॉ. सोनिया नित्यानंद और एमएस डॉ. विक्रम सिंह भी मौजूद रहे।
20 बेड के लिए मिलेगी 15 लाख की आर्थिक सहायता
संस्थान में एमडीआर के उपचार के लिए 20 बेड का अस्पताल तैयार किया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश स्टेट टास्क फोर्स (टीबी उन्मूलन) की ओर से 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश स्टेट टास्क फोर्स (टीबी उन्मूलन) इलाज में भी सहयोग करेगा।