रोनित गुप्ता ने बताया कि वह मेसर्स शाह एजेंसी के नाम से कारोबार करता है। कंपनी उसकी भाभी के नाम पर है। अमरेंद्र के कहने पर ही उसने लखनऊ विश्वविद्यालय के चेक अपने बैंक खाते में कैश कराए थे। पंकज कहां रहता है? इस बारे में जानकारी से आरोपियों ने इनकार किया है।
पुलिस ने उसका मोबाइल नंबर खंगाला तो सिमकार्ड फर्जी आईडी से लिए जाने की जानकारी मिली। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से चार अक्तूबर को हसनगंज कोतवाली में मामले की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने छानबीन के बाद रोनित गुप्ता, सुशील और अमरेंद्र को पकड़ा था।
एसएसपी ने बताया कि छानबीन में लखनऊ विश्वविद्यालय और बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय के चेक ठगों तक पहुंचाने के पीछे उनका ही हाथ है। विश्वविद्यालय व बैंक के 10-12 लोगों पर नजर है। उनकी भूमिका खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि पंकज और मानस का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा तक फैला है।