पंजाब यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में प्राचार्यों की नियुक्ति अब नए सिरे से होगी। इसके लिए बाकायदा विज्ञापन जारी कर आवेदन मांगे जाएंगे। साक्षात्कार के आधार पर प्रिंसिपल का चयन होगा। यह प्रस्ताव पीयू सिंडिकेट की 16 अक्तूबर को होने वाली बैठक में लाया जा रहा है। साथ ही 34 अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगेगी। पीयू सिंडिकेट की ओर से पिछले वर्षों से आठ से नौ कॉलेजों में उन्हीं लोगों को कॉलेजों का प्राचार्य बना दिया जो उसी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस कारण कॉलेज के अन्य शिक्षकों का प्रिंसिपल बनने का सपना टूटने लगा।
शिक्षकों का हक मारा जा रहा था। सिंडिकेट की ओर से तर्क दिया जा रहा था कि प्रिंसिपल के लिए उपयुक्त लोग नहीं मिल पा रहे हैं। व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उनकी दोबारा नियुक्ति की जा रही है। इस प्रकरण को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया तो जिम्मेदार लोगों की आंखें खुलीं। यही नहीं सिंडिकेट की बैठक के अलावा सीनेट में भी बड़ा विरोध हुआ। शिक्षकों की बात सभी ने सामने रखी। कहा गया कि यदि उन्हीं प्रिंसिपल को फिर से चार्ज दिया जाता रहा तो अन्य शिक्षकों का हक मारा जाएगा। लगातार शिक्षकों में आक्रोश है।
उसके बाद इस प्रस्ताव में बदलाव किया गया और नए सिरे से नियुक्ति किए जाने की बात सामने रखी गई। पिछली सिंडिकेट की बैठक में इस प्रस्ताव को शामिल किया गया था, लेकिन बैठक अचानक खत्म हो गई थी। इस बार फिर प्रस्ताव लाया जा रहा है। इस पर मुहर लगने की संभावना है। इसी के साथ सैकड़ों शिक्षकों के सामने प्रिंसिपल बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। शिक्षकों में भी खुशी की लहर है।