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लखनऊ: इंजन और चेसिस नंबर बदलकर ट्रकों को कई बार बेचने वाले गिरोह का खुलासा, एक गिरफ्तार

Thu, 07 Oct 2021 05:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

यूपी एसटीएफ ने ट्रकों के इंजन व चेसिस नंबर बदलकर बेचने वाले ठग को गिरफ्तार किया है। पुलिस को उसके पास से फर्जी रजिस्ट्रेशन पेपर, तीन ट्रक, कई फर्जी दस्तावेज, नंबर प्लेट व अन्य सामान बरामद हुआ है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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लोन पर ट्रक खरीदकर पहले उसकी चोरी कराते थे और फिर इसके बाद ट्रकों के इंजन व चेसिस नंबर बदलकर फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर बेच देते थे। फर्जीवाड़ा करने वाले इस गिरोह के एक सदस्य को एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह की टीम ने काकोरी के भवानीखेड़ा से दबोच लिया। उसके पास से फर्जी रजिस्ट्रेशन पेपर, तीन ट्रक, कई फर्जी दस्तावेज, नंबर प्लेट व अन्य सामान बरामद किया है। इस गिरोह ने बैंक से लोन लेकर पैसा हड़पा तो वहीं दूसरी ओर इंश्योरेंस कंपनी को भी चूना लगाया।

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एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, ट्रकाें के रजिस्ट्रेशन में हेराफेरी कर लाखों रुपये हड़पने वाले गिरोह के बारे में जानकारी एसटीएफ को मिली थी। इस पर एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश ने इस गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए टीमें लगाईं। इस दौरान टीम को सबसे बड़ी सफलता 29 सितंबर को आगरा में मिली। वहां से दो लोग गिरफ्तार किए गए और सात ट्रक पकड़े गए। वही इस गिरोह का नेटवर्क लखनऊ में फैले होने की जानकारी पर काकोरी के भवानीखेड़ा में बुधवार को दबिश दी गई। मौके से पुलिस ने आरोपी सुभाष चंद्र को दबोच लिया। डिप्टी एसपी के मुताबिक, आरोपी के पास से तीन फर्जी रजिस्ट्रेशन वाला ट्रक, 5 इंजन नंबर व चेचिस नंबर की एलुमिनियम की पट्टी, दो मोबाइल, एक ड्राइविंग लाइसेंस, एक आधार कार्ड, एक एसबीआई का एटीएम, पैनकार्ड व नकदी बरामद हुई।

बैंक से लोन हुई गाड़ियाें को बनाते थे निशाना
एसटीएफ डिप्टी एसपी के मुताबिक, पूछताछ में सुभाष ने कुबूल किया कि उसका मालिक अखिलेश सिंह उर्फ अभिषेक उर्फ मनोज है। वह बैंक से लोन कराए गए ट्रकों को निशाना बनाता था। बैंक लोन की किस्त चुकाने में डिफाल्टर हो चुके मालिकों से सस्ते दामों पर ट्रक खरीदता था। इसके बाद भवानीखेड़ा में लाकर ट्रकों का फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर आरटीओ के कर्मचारियों की मिलीभगत कर तैयार कराता था। रजिस्ट्रेशन होने के बाद ट्रकों पर अंकित मूल चेचिस व इंजन नंबर को खराद कर मिटा देते थे। फिर दूसरा चेचिस व इंजन नंबर दर्ज कर देते थे। इस दौरान गिरोह का सदस्य नसीम व बाबू उर्फ मुमताज इंजन नंबर व डैश बोर्ड पर लगी मूल पट्टी को हटाकर दूसरा लगाते थे। इसके बाद इसे बैंक के जरिए दोबारा लोन करा लेते थे। आरोपी ने बताया कि एक ही ट्रक पर दो से चार बार तक चेचिस व इंजन नंबर और ट्रक के मूलरूप में परिवर्तन कर बैंक से लोन कराते थे।
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चोरी का मुकदमा दर्ज करा, हड़पते थे इंश्योरेंस की रकम
डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह के मुताबिक जालसाज बैंक से लोन कराने के बाद एक से पांच किस्त अदा करते थे। इसके बाद किस्तें देनी बंद कर देते थे। इनकी हरकतों से परेशान होेकर बैंक डिफाल्टर घोषित कर देता। इसी बीच मौका देखकर गिरोह के सदस्य गाड़ी गोपनीय जगह छिपाकर चोरी की सूचना आसपास के थानों को देते थे। खासकर ऐसे थानों में मुकदमा दर्ज कराते थे। अगर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो कोर्ट में अर्जी डालकर वकील के जरिए आदेश कराकर अपना काम करवा लेते थे। चोरी का मुकदमा दर्ज होने केबाद गिरोह के सदस्य जो गाड़ी का मालिक होता था। वह इंश्योरेंस के लिए क्लेम करता था। इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम की रकम मिलने के बाद फिर से उसी ट्रक को नए चेचिस व इंजन नंबर व रजिस्ट्रेशन के आधार पर बैंक से लोन कराते थे। एसटीएफ के मुताबिक इस गिरोह का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला है। गिरोह केअन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

बैंक व इंश्योरेंस कंपनी को लगाते थे चूना
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक गिरोह के सदस्य काफी शातिर हैं। सभी का काम अलग-अलग बंटा है। कोई अपने नाम से बैंक से लोन करा 20 से 30 लाख रुपये की ट्रक खरीदता था। इसके बाद चोरी की एफआईआर दर्ज कराने के लिए गिरोह के दूसरे सदस्य सक्रिय हो जाते। वहीं मुकदमा दर्ज होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी पर बीमा की रकम देने के लिए दबाव बनाने का काम भी शुरू होता। इसके लिए पुलिसकर्मियों व वकीलों की मदद ली जाती थी। गिरोह के पकड़े गये सदस्यों ने कुबूल किया है कि कई बैंकों व इंश्योरेंस कंपनियों को करोड़ों रुपये का चूना लगा चुके हैं।

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