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एंबुलेंस हड़ताल : हालात खोल रहे स्वास्थ्य महकमे के दावे की पोल

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लखनऊ। सरकारी एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से चौथे दिन भी मरीजों का बुरा हाल रहा। स्वास्थ्य महकमा 78 में 54 एंबुलेंस शुरू हो जाने का दावा करता रहा, लेकिन जरूरमंदों को एंबुलेंस नसीब नहीं हुई। मरीजों की जान बचाने के लिए तीमारदार उन्हें ऑटो और ई-रिक्शा में लादकर अस्पताल पहुंचे।
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गुरुवार को भी पूरे शहर में एंबुलेंस के लिए मरीजों को परेशान होना पड़ा। सरकारी अस्पतालों से लेकर केजीएमयू पहुंचने वाले करीब 99 प्रतिशत मरीजों को निजी वाहन, ई-रिक्शा या ऑटो का सहारा लेना पड़ा। मरीजों को कॉल सेंटर पर फोन करने के घंटों बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली। सोमवार से चल रही एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल से मरीजों की हालत बिगड़ी हुई है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। जिन्हें एंबुलेंस न मिल पाने की वजह से डिलवरी के लिए निजी वाहन से किसी तरह अस्पताल लाया जा रहा है। डिस्चार्ज होने बाद घर जाने के लिए ऑटो या निजी गाड़ियां करनी पड़ रही हैं। इस सबके बीच सीएमओ डॉ. मनोज का कहना है कि कुछ ही एंबुलेंस का संचालन रुका है, बाकी से सेवाएं दी जा रही हैं।
ई-रिक्शा से पहुंचे ट्रॉमा सेंटर
तालकटोरा विजय नगर के रईस अहदम (55) की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर गई। परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी नहीं आई। इससे मरीज को ई-रिक्शा से केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लाना पड़ा।
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निजी वाहन करना पड़ा
नगराम निवासी प्रशांत (15) को सर्पदंश के बाद परिजनों ने एंबुलेंस के लिए कॉल सेंटर पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। इसके बाद घर वालों ने उसे निजी वाहन से लाकर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।
ऑटो से लाए मरीज
मवइया निवासी माधुरी की दोपहर में तबीयत बिगड़ने पर घर वालों ने सरकारी एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल किया, लेकिन काफी देर तक इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई तो ऑटो से मरीज लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे।
35 एंबुलेंस तो कॉलेज मैदान पर ही खड़ीं
शहर में 108 नंबर की 44 और 102 नंबर की 34 एंबुलेंस हैं। इनसे रोजाना 400 से अधिक मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जाता था। कुल 78 में से 54 एंबुलेंस सड़क पर दौड़ने का दावा करते हुए सीएमओ संचालन सामान्य होने का दावा कर रहे हैं, जबकि लालबाग गर्ल्स कॉलेज के मैदान और बाहर ही करीब 35 एंबुलेंस अब भी खड़ी हैं। ये स्वास्थ्य विभाग के हालात सामान्य होने के दावे की पोल खोल रही हैं।
नए चालक पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं, इसलिए दिक्कत
सीएमओ का कहना है रोडवेजकर्मी, निजी एजेंसी से रखे जा रहे चालकों से एंबुलेंस का संचालन कराया जा रहा है। चालक अभी केस लेने में पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं है। पहले एक एंबुलेंस हर रोज करीब आठ से दस मरीजोें को अस्पताल पहुंचा रही थी। जबकि नए स्टॉफ अभी हर रोज करीब दो से तीन केस निपटा रहे हैं। ऐसे में कॉल आने पर एंबुलेंस व्यस्त होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। एक दो दिन में नए चालकों को रखकर एंबुलेंस का संचालन पूरी तरह से शुरू हो जाएगा। इसके बाद किसी तरह एंबुलेंस मिलने में परेशानी सामने नहीं आएगी।
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