नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने में सपा नेता व भाजपा सरकार में मंत्री रहे स्वार्मी प्रसाद मौर्या के निजी सचिव अरमान खान समेत पांच आरोपियों को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। सभी को बृहस्पतिवार को राजधानी के हजरतगंज के एसबीआई मुख्यालय रोड से दबोचा गया।
एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक सिंह के मुताबिक यह गिरोह नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। उन्होंने बताया कि कुशीनगर के जमालपुर का रहने वाले अरमान खान के खिलाफ नौकरी के नाम पर ठगी का गिरोह संचालित करने की शिकायत मिली थी। गिरोह में उसके अलावा देवरिया के पिपरा दौलाकदम निवासी असगर अली, बस्ती के मुरलीजोत निवासी मो. फैजी व नई बाजार का विशाल गुप्ता और पडरौना के इंदिरानगर कनौजिया वार्ड निवासी अमित राव हैं। गिरोह के अन्य शातिरों की तलाश की जा रही है।
सचिवालय में प्रवेश के लिए बनवा रखा था फर्जी पास
एसटीएफ के डीएसपी के मुताबिक आरोपी असगर अली ने पूछताछ में कुबूल किया कि वह आउट सोर्सिंग पर कई विभागों में कार्य कर चुका है। वह सरकारी पत्र और विभागों की जानकारी रखता है। मास्टरमाइंड अरमान के जरिये सचिवालय में उसकी आसानी से पहुंच थी। उसके पास से अलग-अलग तारीख के वाहन प्रवेश भी मिले हैं। वह बेरोजगारों को अपने साथी जामिल के माध्यम से यहीं फंसाता था। गिरोह गोरखपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, प्रयागराज आदि जिलों के बेरोजगारों को निशाना बनाता था।
अरमान ने कुबूल किया कि वह स्वामी प्रसाद मौर्य का निजी सचिव रहा है। उसका वेतन श्रम विभाग से मिलता था। वह अपने कार्यालय का उपयोग सलाहकार इत्यादि के लिए करता था और बहाने से पूर्व मंत्री को अभ्यर्थियों से मिलवाता रहता था।
ये बरामद : 7 मोबाइल, 57 हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक, 5 कूटरचित आईडी कार्ड, 22 फर्जी नियुक्तिपत्र, 14 लोगों के शैक्षिक प्रमाण-पत्र व अंक पत्र, 2 सचिवालय पास, एक एक्सयूवी-700 बरामद।
सरकारी विभागों में करवाते थे लड़कों की ट्रेनिंग
नौकरी के नाम पर ठगी में दबोचे गए पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के निजी सचिव समेत पांच शातिरों में से मो. फैजी को अरमान के माध्यम से सचिवालय में डिजिटाइजेशन का काम करने वाली कंपनी यूवी टेक में वेंडर सप्लाई का काम मिला। उसने प्राइवेट लड़कों के माध्यम से बाल विभाग, रेशम विभाग, खाद्य एवं रशद विभाग का डिजिटाइजेशन पूर्ण करा लिया। इसे भी सरकारी पत्रों की ठीक ठाक जानकारी थी। इसे सचिवालय परिसर में ही काम करने की जगह मिली थी। जहां सभी आरोपी मिलकर ट्रेनिंग के नाम पर लड़कों को रखते थे। सरकारी भवन में ट्रेनिंग होने से लड़के आसानी से विश्वास कर जाते थे। फैजी का भाई सैफी भी इसमें मिला रहता था।
उधर, विशाल गुप्ता अभ्यर्थियों को यह अपने आप को पूर्व मंत्री का करीबी बताता था और सरकारी विभागों में नियुक्ति व रिक्ति का मास्टर माइंड था। इसका एक साथी स्वप्निल जो पूर्व में जेल जा चुका है उससे मिलकर रेलवे की फर्जी वेबसाइट पर अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन व परीक्षाफल प्रदर्शित करवाता था। जिससे आसानी से लड़के विश्वास कर जाते थे उसके बाद वह अभ्यर्थियों से मनचाही राशि वसूलता था। इनसे कई विभागों के नियुक्तिपत्र व साइन किए हुए खाली चेक मिले हैं। विशाल गुप्ता इस गिरोह से अमित राव, अरमान व फैजी के माध्यम से जुड़ा व असगर के माध्यम से लड़कों से नियुक्ति के नाम पर रुपये लेता था।