एलडीए में जाली दस्तावेज से भूखंड बेचने का मामला आया है। इसमें कर्मचारियों की मिलीभगत से दलालों ने विश्वासखंड की रजिस्ट्री पर विक्रांतखंड में भूखंड बेच दिया। अब सचिव पवन गंगवार ने प्रकरण की जांच नायब तहसीलदार स्निग्धा चतुर्वेदी को दी है।
सचिव ने बताया कि गोमतीनगर के विक्रांतखंड में एक भूखंड 2/1 को जाली दस्तावेज से बेचने की शिकायत मिली थी। इसमें किसी आवंटी की रजिस्ट्री नहीं की।
वहीं, जाली रजिस्ट्री बनाकर प्राइम लोकेशन के इस भूखंड को बाहरी व्यक्ति को बेच दिया गया। पहली रजिस्ट्री की जांच में पता चला कि निबंधन कार्यालय में अंकित नंबर से विश्वासखंड के भूखंड 3/163 की रजिस्ट्री हुई है।
वहीं, जिस व्यक्ति ने भूखंड बेचा। उसका पता डी6/202 विपुलखंड अंकित है। आशंका है कि विश्वासखंड की रजिस्ट्री का उपयोग कर विक्रांतखंड के भूखंड की जाली रजिस्ट्री तैयार की गई। जांच पूरी कर मुकदमा दर्ज कराने को नायब तहसीलदार को कहा गया है।
विभूतिखंड के भूखंड पर नक्शा होगा निरस्त
इधर, सचिव ने विभूतिखंड के व्यावसायिक भूखंड 3/43 में फर्जीवाड़ा पता चलने के बाद स्वीकृत नक्शे को निरस्त करने का आदेश मानचित्र सेल के प्रभारी अधिशासी अभियंता भूपेंद्र बीर सिंह को दिया है। यह भूखंड भी जाली रजिस्ट्री कर बेचा गया। यहां निर्माण शुरू नहीं हुआ था।
चार भूखंड में एफआईआर का आदेश
प्रियदर्शिनी में हाइटेंशन लाइन से खाली हुई जमीन पर दिवंगत बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा द्वारा खुद काटे गए चार भूखंड की जांच पूरी हो गई है। इसमें बड़ी गड़बड़ी मिलने के बाद सचिव ने एफआईआर कराने का आदेश कर दिया है। पूर्व में अमर उजाला ने यह प्रकरण प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसमें खुद का नियोजन कर एलडीए से बाहर ही बाबू द्वारा रजिस्ट्री कर बेच दिए जाने का मामला उठाया गया। एक भूखंड का मानचित्र भी एलडीए ने स्वीकृत कर दिया था। इसे तभी निरस्त कर काम रुकवा दिया गया था।