हिमांशु अवस्थी
सरकारी अस्पतालों में फ ायर फ ाइटिंग सिस्टम लगाने के नाम पर अफसरों ने करोड़ों रुपये फूं क डाले। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था-ठेकेदार आधा-अधूरा काम छोड़कर चले गए। ऐसे में यहां लगे उपकरण कबाड़ होने की कगार पर हैं। अस्पताल प्रभारियों ने कार्यदायी संस्था को काम पूरा करने के लिए कई बार पत्र लिखे, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शहर के बड़े सरकारी अस्पतालों समेत नौ सीएचसी में फायर फाइटिंग सिस्टम लगना था। शासन से वर्ष 2017 के आखिर में लैकपेड कार्यदायी संस्था को काम सौंपा था। इस काम के लिए दस करोड़ से अधिक राशि कार्यदायी संस्था को मिल चुकी है। फिर भी कार्यदायी संस्था तय समय पर काम पूरा नहीं कर सकती है। ऐसे में फायर विभाग से किसी भी अस्पताल को अभी तक एनओसी मिली है। सूत्रों के मुताबिक ये पूरा खेल ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से हुआ है। हर अस्पताल में काम अधूरा पड़ा है। ऐसे में किसी भी अस्पताल में अग्निकांड होने पर मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है, मगर अफसरों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ठाकुरगंज टीबी हॉस्पिटल के सीएमएस डॉ. आनंद बोध ने बताया कि काम कई साल से बंद पड़ा है। सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि कुछ काम अभी बचा हुआ है। वहीं डफरिन अस्पताल की निदेशक डॉ. सीमा का कहना है कार्यदायी संस्था आधा काम छोड़कर चली गई है।
ट्रॉमा अग्निकांड के बाद शासन ने लिया था सबक
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में अग्निकांड में छह मरीजों की जान चली गई थी। शासन ने अग्निकांड से सबक लेते हुए अस्पतालों में भी फायर सिस्टम दुरुस्त किए जाने का फैसला लिया था। करोड़ों रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया गया। मगर चार साल बीतने के बाद भी सरकार अस्पताल आग से लड़ने को तैयार नहीं हो पाए हैं।
पाइपलाइन बिछी, पर कनेक्शन नहीं जुड़े
सरकारी अस्पतालों में फायर फाइटिंग के नाम पर कार्यदायी संस्था ने पानी की पाइपलाइन समेत उपकरण तो टांग दिए, मगर किसी भी अस्पताल में कनेक्शन नहीं जोड़े गए। ऐसे में सालों से लगे उपकरण खराब हो रहे हैं। अस्पताल प्रभारी लगातार कार्यदायी संस्था को पत्र भेजकर काम पूरा करने की मांग कर रहे हैं, मगर सुनवाई नहीं हो रही है।
सिर्फ लोकबंधु को मिली फायर एनओसी
राजधानी में अभी तक सिर्फ लोकबंधु अस्पताल में ही कार्यदायी संस्था ने काम पूरा किया है, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने फायर विभाग को एनओसी के लिए आवेदन किया था। मानक पर खरे उतरने के बाद फायर विभाग की तरफ से अस्पताल को एनओसी जारी की गई है।
अस्पतालों के अपने इंतजाम भी नाकाफी
अस्पतालों के पास अपने फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। अस्पतालों में मरीजों, उनके परिवारीजनों और चिकित्सीय स्टाफ आदि को मिलाकर करीब तीन से चार हजार लोग हर वक्त मौजूद रहते हैं। इतने लोगों को आग से सुरक्षित बचाना काफी मुश्किल होगा। वहीं कुछ समय के अंतराल पर मॉकड्रिल कराने का भी नियम है, मगर सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी से जुड़ी मॉकड्रिल नहीं कराई जाती।
इन अस्पतालों में अधूरा पड़ा काम
सिविल अस्पताल, ठाकुरगंज टीबी हॉस्पिटल, रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल, बीआरडी महानगर, डफरिन अस्पताल, चिनहट सीएचसी, बीकेटी सीएचसी समेत सभी ग्रामीण सीएचसी में काम अधूरा है।