इसका किट सीएसआईआर, इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोमिक्स और इंटीग्रेटिव बायोलॉजी की ओर से तैयार किया गया है। इस जांच में 40 मिनट से 1 घंटे के अंदर रिजल्ट मिल जाता है। इसका रिजल्ट 98 फीसदी तक सटीक पाया गया है। अन्य जांच की अपेक्षा इसका खर्च कम बताया गया है। हालांकि इसमें भी मरीजों के सैंपल लेने के बाद आरएनए एक्सट्रैक्शन और एमप्लीफिकेशन आदि की प्रक्रिया पहले की तरह ही होती है।
नामकरण की कहानी
फेलूदा का नाम डायरेक्टर सत्यजीत रे की फिल्म के एक काल्पनिक पात्र पर रखा गया है। इस किट को विकसित करने वाले वैज्ञानिक देबोज्योति चक्रवर्ती और डॉ. सौविक मैती हैं। वे सत्यजीत रे के फैन हैं। इसलिए इसका नाम फेलूदा रखा।