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रफ्तार पकड़ते बाजार को झटका दे रहा वीकेंड लॉकडाउन, व्यापारियों ने बयां की अपनी पीड़ा

Mon, 17 Aug 2020 05:19 PM IST
ishwar ashish नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
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कपूरथला में दिखा सन्नाटा - फोटो : amar ujala
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अनलॉक के बाद रफ्तार पकड़ते लखनऊ के बाजारों को दो दिन के वीकली लॉकडाउन से करारा झटका लगा है। अनलॉक के शुरुआती दौर में 20 फीसदी के करीब कारोबार करने वाले बाजार इन दिनों अपने सामान्य कारोबार के 70 से 80 फीसदी पर आ गए हैं। सोमवार से शुक्रवार के दौरान रोज का कारोबार 100 करोड़ के करीब पहुंच गया है।
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जबकि शनिवार और रविवार को इसमें 40 फीसदी की और वृद्धि हो जाती है। इन दिनों इसी 280 करोड़ के कारोबार से बाजार वंचित हैं। जाहिर है कि वीकली लॉकडाउन से बाजार को तगड़ी चोट लगी है। यहियागंज, अमीनाबाद, नाका, आशियाना और भूतनाथ मार्केट आदि बाजारों के व्यापारियों ने बताया कि सप्ताह के आखिरी दो दिनों में नौकरीपेशा लोग खरीदारी करने निकलते हैं।

इससे आम दिनों के अपेक्षा अधिक कारोबार होता है। अगर वीकली लॉकडाउन से राहत मिल जाए तो बाजार अपनी पुरानी रंगत में लौट आएंगे। व्यापार मंडल के पदाधिकारी व्यापारियों ने बताया कि कोरोना काल से पहले नौ महीने अक्तूबर से जून तक रोजाना सभी बाजारों का 200 करोड़ रुपये रोज का व्यापार होता था। क्योंकि इस दौरान नवरात्र, दिवाली, होली और सहालग में ग्राहक जमकर खरीदारी करते हैं। जबकि जुलाई, अगस्त और सितंबर में 125-150 करोड़ रुपये रोजाना का व्यापार होता है।
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बंदी के बाद भी बढ़ रहे मरीज

सतपाल सिंह, अमरनाथ मिश्र - फोटो : amar ujala
बंदी का कोई अच्छा परिणाम नहीं निकल रहा है। संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसलिए शनिवार व रविवार की बंदी खत्म करके साप्ताहिक बंदी को लागू किया जाए। - सतपाल सिंह मीत ,अध्यक्ष नाका बाजार व्यापार मंडल

साप्ताहिक बंदी से भी नहीं होगी भीड़
शहर में अलग-अलग तीन दिन बुधवार, गुरुवार व रविवार को साप्ताहिक बंदी रहती है। अगर वही व्यवस्था कर दी जाए तो एक साथ भीड़ भी नहीं होगी। दो दिन की बंदी से व्यापार का नुकसान है। - अमरनाथ मिश्र, वरिष्ठ महामंत्री लखनऊ व्यापार मंडल 

होलसेल कारोबारियों की बड़ी दिक्कत

पवन मनोचा, देवेंद्र गुप्ता - फोटो : amar ujala
लखनऊ में हमेशा से सरकारी या प्राइवेट संस्थान बंद होने पर ही ग्राहक बाजारों के रुख करता था। होलसेल बाजारों में दिक्कत बढ़ गई है। क्योंकि बाहर से आने वाला ग्राहक भी नहीं आ पाता है। - पवन मनोचा अध्यक्ष नाका परिक्षेत्र व्यापार मण्डल  

शनिवार-रविवार को खुलें बाजार
साप्ताहिक बंदी जैसे कस्टमर के दिमाग में अभी भी ट्रांसगोमती क्षेत्र में बुधवार बंदी का ही दिन रहता है। इससे बुधवार को भी व्यापार बहुत ही कम रहता है। सप्ताह के आखिरी दो दिनों में बाजार खोले जाएं। - देवेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष भूतनाथ व्यापार मंडल 

व्यापार की दृष्टि से रविवार महत्वपूर्ण 

जितेंद्र सिंह चौहान, मनीष कुमार - फोटो : amar ujala
शनिवार व रविवार को बंदी से व्यापार प्रभावित हो रहा है। पर, शासन के सही या गलत निर्णय मानने के लिये बाध्य हैं। - जितेंद्र सिंह चौहान, व्यापारी नेता अमीनाबाद 

रविवार को सभी करते हैं खरीदारी
बाजार ज्यादातर गुरुवार या बुधवार को बंद रहते है। सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी शनिवार या इतवार को रहती है। कर्मचारी इसी दिन खरीदारी भी कर लेते हैं। - मनीष कुमार वर्मा, अध्यक्ष-लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन   

 
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कोरोना पर भी ब्रेक नहीं, लगातार बढ़ रहे केस

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दो दिन के साप्ताहिक लॉकडाउन से कोरोना संक्रमण की गति कुछ धीमी जरूर पड़ती है, लेकिन दूसरे और तीसरे दिन फिर से वायरस पूरी गति से बढ़ने लगता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि दो दिन के बजाय हर दिन व्यक्ति को हर स्तर पर सावधानी बरतनी होगी। चिकित्सा विशेषज्ञों का तर्क है कि शनिवार और रविवार को लॉकडाउन होने के बाद सोमवार और मंगलवार को अपेक्षाकृत बाजार में भीड़ अधिक होती है।

लॉकडाउन का फायदा इतना जरूर है कि सैनिटाइजेशन करने और अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए वक्त मिल जाता है। शनिवार और रविवार की बंदी की वजह से लोग घरों में रहते हैं। ऐेसे में तेजी से बढ़ने वाली वायरस की चेन धीमी हो जाती है। हर व्यक्ति को कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन करना होगा तभी इससे निजात मिलेगी। 

हर साप्ताहिक लॉकडाउन के बाद सोमवार को मिले मरीज
  6 जुलाई      37
13 जुलाई    196
20 जुलाई    282
27 जुलाई    312
 3 अगस्त    507
10 अगस्त   629

अगले दिन उमड़ती है भीड़
साप्ताहिक लॉकडाउन से वायरस के फैलाव की गति धीमी हो जाती है। ऐसे में प्रशासन को अपनी तैयारी करने के लिए समय मिल जाता है। कार्यालयों, दुकानों आदि के सैनिटाइजेशन का वक्त मिलता है। लेकिन अगले दिन भीड़ बढ़ने की वजह से फिर स्थिति अनियंत्रित हो जाती है। - डॉ. जीके सिंह, पूर्व निदेशक एम्स पटना।
 
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