लखनऊ। भारत में पांच हजार वर्षों से प्रचलित आयुर्वेद दुनिया की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में से है। रसोई में परंपरागत तरीके से जिन मसालों व हल्दी, अदरक, तुलसी, मोरिंगा आदि का हम रोजाना इस्तेमाल करते हैं, उनमें औषधीय गुण हैं। सिर्फ इनके सही मात्रा में इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए। ये बातें मंगलवार को आईआईटीआर परिसर में बंगलूरू से आए फार्मास्युटिकल वैज्ञानिक डॉ. डीबी अनंथा नारायण ने कही।
डॉ. नारायण ने बताया कि मोरिंगा न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि इसमें सूजन घटाने का भी औषधीय गुण है। उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के महात्म्य पर प्राचीन वेदों और अन्य शास्त्रों का भी जिक्र किया। आईआईटीआर संस्थान में हीरक जयंती के आयोजनों के क्रम में डॉ. डी बीए नारायण ने वैज्ञानिकों व शोधार्थियों को संबोधित किया।