दीपावली तक घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को कीमत में बढ़ोत्तरी का झटका लग सकता है।
घरेलू एलपीजी आपूर्ति से जुड़े गैस डीलरों का बढ़ा कमीशन कस्टमरों की जेब हल्की करेगा।
ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन की मांग पर डीलरों के कमीशन में प्रस्तावित बढ़ोत्तरी लागू होने पर इसे सिलेंडरों के दाम में शामिल कर कस्टमरों से ही वसूला जाएगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका है कि डीलरों के इस बढ़े कमीशन का भार तेल कंपनियों पर नहीं डाला जाएगा।
ऐसे में दीपावली से पहले डीलरों के कमीशन दर की बढ़ोत्तरी का ऐलान सिलेंडर का दाम 3.50 से 15 रुपया तक महंगा करेगा।
घरेलू एलपीजी वितरण से जुड़े डिस्ट्रीब्यूटर बीते लंबे समय से वर्तमान में निर्धारित घरेलू व व्यवसायिक सिलेंडरों पर तय कमीशन दर को नाकाफी बताते हुए इस बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
फेडरेशन पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में घरेलू सिलेंडरों पर प्रति सिलेंडर 37 रुपया और व्यवसायिक पर 45 रुपया तक ही कमीशन मिलता है।
लगातार बढ़ रही महंगाई व अन्तर्राष्ट्रीय बाजार के आधार पर तय होने वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वर्तमान कमीशन दर से एजेंसी संचालन का खर्च तक निकालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में एजेंसी संचालकों ने वर्तमान कमीशन दर को 60 रुपया करने की मांग केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के समक्ष उठायी है।
तेल कंपनियों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कमीशन दर में एकमुश्त 60 रुपया तक बढ़ोत्तरी करना संभव नही हो सकता।
इसके चलते ही मंत्रालय स्तर से फिलहाल बीच का रास्ता निकालते हुए घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की सब्सिडी व नॉन सब्सिडी श्रेणी पर वर्तमान कमीशन दर में 3.50 रुपया बढ़ोत्तरी कर इसे 40.50 रुपया करने और व्यवसायिक सिलेंडर की कमीशन दर में 15 रुपया बढ़ोत्तरी कर 60 रुपया तक करने का मन बना लिया है।
फेडरेशन की मांग के आधार पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय दीपावली से पहले इस शर्त के साथ डीलर कमीशन बढ़ाने का ऐलान कर सकता है कि इसकी भरपायी तेल कंपनियों के स्तर से करते हुए कस्टमरों के विक्रय मूल्य के आधार पर हो।
ऐसी स्थिति में एलपीजी सिलेंडरों की वर्तमान खुदरा दर में बढ़ोत्तरी करना तेल कंपनियों की मजबूरी हो जाएगी ताकि डीलरों के बढ़े हुए कमीशन का पैसा उपभोक्ताओं के माध्यम से जुटाया जा सके।
इस संबंध में फेडरेशन के यूपी अध्यक्ष डीपी सिंह का कहना है कि कमीशन बढ़ोत्तरी पर फेडरेशन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ मंत्रालय स्तर पर सहमति लगभग बन चुकी है।
जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा संभव है। इससे हर माह रेट रिवीजन के कारण बढ़ने वाली इन्वेस्टमेंट कॉस्ट की व्यवस्था करने में कुछ हद तक सहूलियत होगी।