समिति ने जांच में पाया कि अमन शर्मा ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी रहते हुए न तो सुपरटेक टावर को किसी तरह का अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया और न ही कोई मानचित्र पास किया। बल्कि जो खामियां थीं उन्हें इंगित करते हुए अमन शर्मा ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। ऐसे में इस प्रकरण में उनका दोष साबित नहीं होता।
इसी तरह राजपाल सिंह त्यागी, मुनेंद्र कुमार त्यागी और अरुण चतुर्वेदी के ऊपर लगे आरोपों को भी विभागीय जांच में खारिज कर दिया गया। जबकि आईएस सोनी, महावीर सिंह और तत्कालीन अग्निशमन अधिकारी अभय भान पांडेय की ओर से की गई कार्रवाई में अनियमितता पाई गई है।
विभाग के सूत्रों का कहना है कि अमन शर्मा ने सुपरटेक टावर के बिल्डर को कारण बताओ नोटिस तो जारी किया लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं की, क्या इसमें उनकी संलिप्तता नहीं थी? राजपाल सिंह त्यागी, मुनेंद्र कुमार त्यागी और अरुण चतुर्वेदी ने भी अपनी जिम्मेदारियों को सही से नहीं निभाया, जिसके चलते एसआईटी ने कार्रवाई की सिफारिश की थी।