पिता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। इस मामले की सुनवाई पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद मिरा की कोर्ट में चल रही थी। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने आरोपी प्रेमचंद्र उर्फ पप्पू दीक्षित को दोषी करार दिया। उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने अपना फैसला 99 पन्नों में दिया है। जिसमें इस बात का साफ जिक्र किया गया है कि मृत्युदंड के लिए आरोपी की जब तक मौत न हो जाए उसे फांसी के फंदे पर लटकाया जाए।
कोर्ट ने इस मामले में कहा कि अभियोजन ने परिस्थित जन्य साक्ष्य और वारदात की कड़ियों को जोड़ते हुए श्रृंखला प्रस्तुत की है। जिसमें अंतिम बार अभियुक्त के साथ पीड़िता/मृतका को सही सलामत देखा गया तथा उसके बाद अभियुक्त के पास से ही पीड़िता के मरणासन्न/अचेत अवस्था में बरामद होने की परिस्थितियां साबित करती हैं कि वारदात को उसी ने अंजाम दिया है। इस मामले में वारदात को आरोपी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा किए जाने का निष्कर्ष नहीं निकलता है। बल्कि उक्त परिस्थितियों में सिर्फ और सिर्फ यही निष्कर्ष निकलता है कि अभियुक्त द्वारा पीड़िता को ले जाकर उसके शरीर में इस प्रकार चोट पहुंचाई गई। जिससे बच्ची की मृत्यु हो गई।
सजा नहीं दी तो फूल जैसी बच्ची के साथ अन्याय होगा
कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि इस मामले को देखते हुए कोई भी व्यक्ति अपने छोटे बच्चे को न तो परिवार के किसी व्यक्ति पर विश्वास करके देगा। वहीं न ही उसे किसी अन्य व्यक्ति को देगा। अगर समाज में ऐसा विश्वास का माहौल व्याप्त हो गया तो समाज का पूरा तानाबाना खत्म कर देगा। जबकि मनुष के सामाजिक जीवन में समाज के नियमों का पालन करते हुए रहने का गुण ही उसे मनुष्य बनाता है और पशुओं से अलग करता है। इस मामले को विरल से विरलतम की श्रेणी का बताते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त द्वारा मासूम बच्ची के साथ बालात्संग करके उसकी हत्या कर दी है। उसे यदि न्यायालय अभियुक्त को विधि द्वारा दिए गये अधिकतम दंड से दंडित नहीं करता है तो वह फूल जैसी बच्ची के साथ अन्याय होगा।
पांच माह की मासूम से दुष्कर्म करने वाले की क्रूर मानसिकता का
कोर्ट ने कहा कि गवाही के दौरान डॉ. अनामिका गुप्ता से कई सवाल किये गये। उन्होंने बच्ची के निजी अंगों पर आई चोटों की पुष्टि पत्रावली पर आए साक्ष्य से की है। कोर्ट ने निर्णय में कहा कि घटना के समय पीड़िता की उम्र मात्र पांच महीने 13 दिन की थी। यदि कोई व्यक्ति छोटी बच्ची को अगवा कर उसके सज्ञथ दुष्कर्म करता है तो कोई भी सामान्य बुद्घिवाला यही अवधारणा करेगा कि हर परिस्थिति में बच्ची की मृत्यु हो जाएगी। इस मामले में अभियुक्त मासूम बच्ची को खिलाने के बहाने उसकी मां के पास से लेकर गया था।
मामले के तथ्य व परिस्थितियों को देखते हुए अभियोजन पक्ष आरोपी प्रेेमचंद्र उर्फ पप्पू दीक्षित के खिलाफ युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है। अभियुक्त द्वारा ही बच्ची को अपनी अभिरक्षा में ले जाकर ऐसी चोटें पहुंचाई जिससे उसकी मृत्यु हो गई। कोर्ट में जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज त्रिपाठी, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नवीन त्रिपाठी, विशेष अधिवक्ता अभिषेक उपाध्याय व सुखेंद्र प्रताप सिंह ने इस मामले में महज 11 महीने की सुनवाई के बाद सजा करवाई है।
सरकारी वकीलों ने मामले को विरलतम से विरल श्रेणी का बताया। दोषी को फांसी की सजा से दंडित करने की मांग करते हुए कहा कि दोषी के साथ दुष्कर्म करके जघन्य तरीके से हत्या कर दी गई। वारदात के समय मासूम की उम्र महज 5 महीने 13 दिन की थी। आयु को देखते हुए वारदात ने पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया है। सरकारी वकीलों द्वारा यह भी कहा गया कि अभियुक्त पीड़िता का निकट रिश्तेदार और सागा ममेरा भाई था। इसके बावजूद भी उसके द्वारा ऐसी घटना किए जाने से कोई व्यक्ति अपनी बच्ची को किसी भी व्यक्ति के साथ खिलाने के लिए नहीं देगा। लिहाजा यह मामला मृत्यु दंड से दंडित किए जाने योग्य है।
इस मामले में पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने 26 फरवरी 2020 को संज्ञान लिया था। 2 मार्च 2020 को आरोपी को अभियोजन की प्रतियां और 19 फरवरी 2021 को विधिविज्ञान प्रयोगशाला के रिपोर्ट की प्रतियां दी गई थी। वही आरोपी पर 7 मार्च 2020 को आरोप तय करते हुए गवाही शुरू की गई थी। इस मामे में अभियोजन की तरफ से कुल 10 गवाह जबकि बचाव पक्ष की तरफ से दो गवाह पेश किये गये थे।
इन धाराओं में सुनाई यह सजा
मासूम से दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के अपराध के लिए मृत्युदंड व 50 हजार रुपये का जुर्माना
मासूम की हत्या के करने के लिए मृत्युदंड व 50 हजार रुपये का जुर्माना
मासूम को अगवा करने के लिए आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये का जुर्माना
कोर्ट ने कहा कि जुर्माने की पूरी रकम प्रतिकर के रूप में मृतका मासूम के पिता को अदा की जाएगी।