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बैंक की खामियों से करोड़ों उड़ाने वाले साइबर जालसाज गिरफ्तार

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साइबर क्राइम सेल और हजरतगंज पुलिस की टीम ने ठगों को दबोचा। - फोटो : ??? ?????
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साइबर क्राइम सेल व हजरतगंज पुलिस ने बैंक की खामियों का फायदा उठाकर लोगों के खाते से करोड़ों रुपये उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है।
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पुलिस गिरफ्त में आए गिरोह के मास्टर माइंड प्रमोद मंडल व चार अन्य सदस्य शामिल हैं। उनके पास से पुलिस ने 1.20 लाख रुपये और छह मोबाइल के अलावा कई सामान बरामद किया है।
एसीपी साइबर क्राइम सेल विवेक रंजन राय के मुताबिक, सचिवालय में तैनात कर्मचारी ने हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि जालसाजो ने एसबीआई के बैंक मैनेजर बनकर खाते से 53 लाख रुपये साफ कर दिए।
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वहीं, हरदोई में तैनात एक दरोगा के खाते से भी लाखाें रुपये उड़ा लिए थे। पुलिस ने सचिवालय से रिटायर कर्मचारी के खाते से 53 लाख उड़ाने के मामले में पिछले साल जामताड़ा से 11 ठगों को दबोचा था।
वहीं, गिरोह का सरगना व मास्टर माइंड प्रमोद मंडल अपने कुछ साथियों संग फरार हो गया था। उसकी तलाश में पुलिस टीम ने जामताड़ा से दिल्ली के संभावित ठिकानों पर दबिश दी। लेकिन वह नहीं मिला।
पुलिस के मुताबिक गिरोह का मास्टर माइंड व सरगना प्रमोद मंडल अपने साथियों से मिलने के लिए गोसाईंगंज जेल जा रहा है। मोहनलालगंज रोड पर इंदिरा नहर के पास से प्रमोद मंडल सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए आरोपियों में झारखंड के दुमका के सलजोरा बंदरी निवासी विजय मंडल उर्फ प्रमोद मंडल, मनोज मंडल, राजेश कुमार मंडल, करन कुमार मंडल और घोटिया बड़ा असाहना का जितेंद्र कुमार मंडल है।
एसबीआई के सिक्योर एप को रजिस्टर्ड कर करते थे ठगी
एसीपी साइबर क्राइम विवेक रंजन राय के मुताबिक, इस गिरोह के निशाने पर खासतौर से एसबीआई के खाताधारक रहते हैं। गिरोह के गुर्गे कॉल कर झांसा देकर उपभोक्ताओं से वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) मांग कर इंटरनेट बैंकिंग का एक्सेस ले लेता है। फिर नेट बैंकिंग के जरिए उक्त खाते में एसबीआई के सिक्योर एप को रजिस्टर्ड कर लेता है। इस एप में एक बार ओटीपी की जरूरत होती है। क्योंकि यह एप नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें रकम एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए बार-बार ओटीपी नहीं आता है। इसका फायदा उठाते थे। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा के मनी पासबुक व अन्य बैंकों द्वारा चलाए जा रहे कस्टमर एप की खामियों के कारण खाता खंगालते थे।
फर्जी खातों व वॉलेट में ट्रांसफर करते है रकम
साइबर क्राइम सेल के निरीक्षक मथुरा राय के मुताबिक, खाताधारकों को सीधे कॉल कर उनसे बैंक डिटेल हासिल करते। जिसमें खाता नंबर, एटीएम कार्ड नंबर, पासवर्ड, एक्सपायरी डेट, सीवीवी, ओटीपी लेकर नेट बैंकिंग जनरेट कर खाते से रकम उड़ा लेते हैं। बैंक डिटेल हासिल कर जालसाज ग्राहकों के खाते से रकम उड़ाना शुरू करते हैं। इसके लिए वह फर्जी खाता और वॉलेट में ट्रांसफर कर लेते हैं। वहीं से निकालकर अपने उपयोग में ले लेते हैं।
एफडी पर लोन कराकर खाते से उड़ाते हैं रकम
प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक, पूछताछ में जालसाजों ने बताया कि यदि किसी ने खाताधारक बैंक में एफडी व अन्य माध्यम से रकम जमा की है तो उन खातों पर लोन कराते हैं। लोन की रकम को हासिल करने के लिए फर्जी खातों का इस्तेमाल करते हैं।
बंटा है सभी का काम, उसी पर मिलता था हिस्सा
साइबर क्राइम सेल के निरीक्षक मथुरा राय के मुताबिक, गिरोह के हर सदस्यों का काम बंटा है। उनको उसी के आधार पर ठगी की रकम का हिस्सा दिया जाता है। कोई फर्जी सिम व फर्जी खाते खोलता है, कोई पुलिस की जानकारी देता है। वहीं, कुछ लोग कॉल कर बैंक खाते की डिटेल हासिल करने का काम। खाते से रकम निकालने का काम भी गिरोह का दूसरा गुर्गा करता है। सभी को काम के हिसाब से हिस्सा मिलता है। वहीं, खाता उपलब्ध कराने वाले सदस्य काफी तेज होते हैं। वह मजदूरों से मजदूरी उनके खाते में देने के नाम पर खाता खुलवाते हैं और पासबुक व एटीएम अपने पास ही रखते हैं। ठगी के रुपये को इन खातों में जमा करते हैं।
निशाने पर सीयूजी और विशेष सीरीज के नंबर
जालसाजों ने कुबूला कि उनके निशाने पर सीयूजी और विशेष सीरीज के मोबाइल नंबर होते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा एक एप लॉन्च किया गया है। बड़ौदा एप पासबुक जिस पर एक सीरीज के मोबाइल नंबर को डालते हैं। जैसे ही संबंधित मोबाइल पर ओटीपी आ जाता है। हम समझ जाते कि इस नंबर को प्रयोग करने वाले का खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में है। फिर उसे कॉल कर खाते की जानकारी लेकर रुपये साफ कर देते हैं। इसी तरह हीरो फाइनेंस एप में कस्टमर आईडी की एक सीरीज डालते हैं। जिसमें ज्यादा बकाया है। हम छूट देने के ऑफर के जरिए उनके खाते से रकम उड़ाते हैं। जालसाजों के निशाने पर ज्यादातर सचिवालय, पुलिस व सरकारी विभाग के रिटायर कर्मचारी व अधिकारी होते हैं। खासकर वे लोग जो इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल नहीं करते हैं या उनको जानकारी नहीं होती है।
15 राज्यों की पुलिस कर रही थी तलाश
साइबर क्राइम सेल के अधिकारी के मुताबिक इस गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश ही नहीं दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट और झारखंड समेत अन्य प्रदेशों में सैकड़ों मुकदमे दर्ज हैं। झारखंड में सिर्फ 36 मुकदमे दर्ज हैं। जिसकी जानकारी लखनऊ कमिश्नरेट की साइबर क्राइम सेल को हो सकी है। वहीं लखनऊ में इसकी संख्या सौ से अधिक है। इस गिरोह को 15 राज्यों की पुलिस तलाश रही है।
जेसीपी लॉ एंड ऑर्डर ने बुलाई बैंक अधिकारियों की बैठक
एसीपी साइबर क्राइम सेल विवेक रंजन राय के मुताबिक सोमवार देर शाम को संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था ने बैंक अधिकारियों व पुलिस की एक संयुक्त बैठक बुलाई। जिसमें बैंक की खामियों को दूर करने और खातों को सुरक्षित बनाने के संबंध में कई पहलुओं पर चर्चा की गई। इस दौरान बैंक अधिकारियों से अपने पब्लिक एप को साइबर हमले से सुरक्षित बनाने की बात कही गई।
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इस टीम को मिली सफलता
गिरोह का पर्दाफाश करने में अतिरिक्त निरीक्षक हजरतगंज अनिल कुमार सिंह, एसआई शिशिर यादव, धनंजय सिंह, मुख्य आरक्षी फिरोज बदर, रणधीर सिंह, अजय प्रताप सिंह, अखिलेश पटेल, गोविंद सिंह, अविनाश वर्मा, मानेंद्र विक्रम सिंह, जयप्रकाश यादव, अमित कुमार।
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