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वकील को पांच साल की जेल, चौदह हजार जुर्माना

Thu, 14 Aug 2014 12:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,लखनऊ
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एटीएस के विशेष एसीजेएम बालकृष्ण एन रंजन ने मुंबई जेल में बंद डी-कंपनी के गुर्गों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले वकील को पांच साल की कैद व 14 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।
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श्रीलंका पुलिस द्वारा पकड़े डी कंपनी के शूटर से पूछताछ के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की पड़ताल में वकील के कारनामे उजागर हुए थे।

एटीएस के सरकारी वकील बृजेश जायसवाल ने बताया कि डी कंपनी के शूटर मिर्जा आरिफ बेग उर्फ पाल उर्फ नासिर उर्फ जिम्मी फर्जी पासपोर्ट के सहारे कोलंबो गया था।

वहां चेकिंग में शक होने पर श्रीलंका पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके भारत के हाईकमीशन को सूचना दी। उसे भारत लाया गया।

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फर्जी पासपोर्ट की तहकीकात शुरू की। इसके साथ एटीएस की लखनऊ टीम ने मिर्जा आरिफ बेग से पूछताछ की।

इसमें खुलासा हुआ कि मुंबई जेल में मिर्जा आरिफ बेग के साथ अशरफ सिद्दीकी बंद था।

अशरफ के भाई हसीन सिद्दीकी ने वकील वसी हैदर की मदद से अपना व मिर्जा आरिफ बेग का फर्जी पासपोर्ट बनवाया था।
 
सरकारी वकील के मुताबिक, वकील वसी हैदर ने जेल में बंद मिर्जा आरिफ बेग का पासपोर्ट नसीर और हसीन सिद्दीकी का पासपोर्ट जहांगीर के नाम से बनवाने का आवेदन किया था।
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उसने खुद ही पासपोर्ट फार्म भरा, शपथपत्र तथा लखनऊ के पासपोर्ट कार्यालय से सत्यापन कराया। एटीएस के एसआई भानुप्रताप सिंह ने विभिन्न दस्तावेजों से वसी हैदर की लिखावट का मिलान कराया।

पता चला कि डी कंपनी के गुर्गों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने की सारी औपचारिकताएं वसी हैदर ने अपने हस्तलेख से की थी।

तहकीकात में पाया गया कि नसीर, समीर व हसन सिद्दीकी बलरामपुर के उतरौला नगवा के निवासी हैं और उतरौला के रफीक के प्रार्थनापत्र के साथ लगाए गए शपथपत्र को बलरामपुर उतरौला के नोटरी बालचंद्र गुप्ता ने सत्यापित किया था।

आरिफ बेग, समीर खान व जहांगीर उर्फ हसीन सिद्दीकी के फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने में दलालों की भी खासी भूमिका रही थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में आरोपी वकील वसी हैदर को पासपोर्ट अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त करते हुए कहा कि विवेचना में कहा गया है कि पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं में अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिल पाई है लिहाजा आरोपी को पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं से दोषमुक्त किया जाता है।
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