लालबत्ती और हूटर लगी कार, सुरक्षा के लिए सिपाही, मंत्री कहकर संबोधन। जहां भी वोटों की गुंजाइश लगी, वहां सोशल, पॉलिटिक ल स्टेटस से जुड़ी ये सुविधाएं तत्काल हाजिर।
राज्यमंत्री का दर्जा पाने के लिए दावेदारों की लाइन लगी तो लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी सपा सरकार ने मायूस भी नहीं किया।
सौ से करीब नेताओं को लालबत्ती से नवाज दिया। अब हाईकोर्ट के आदेश से वीआईपी बनने का सपना संजोए रखने वाले कई लोगों का लालबत्ती का तिलिस्म टूट सकता है।
सरकार कोई भी रही हो, अपने वर्करों को उपकृत करने में पीछे नहीं रहती। जब से 15 फीसदी से ज्यादा विधायकों को मंत्री न बनाने का आदेश लागू हुआ है, तब से सत्तारूढ़ सियासी दलों ने लालबत्तियां बांटने का नया रास्ता तलाश लिया है।
बसपा सरकार के कार्यकाल में 18 जुलाई 2007 को राज्यमंत्री का दर्जा देने का शासनादेश जारी करके तमाम नेताओं को लालबत्तियां बांटी। सपा सरकार भी इसमें पीछे नहीं रही। बड़ी उदारता से सपाइयों को लालबत्तियां दी गईं।
हालत यह हो गई कि राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त करने वाले सपा नेताओं की तादाद सौ पार कर गई है। पिछले एक पखवाड़े में ही दो दर्जन से ज्यादा नेताओं को लालबत्तियां दे दी गईं।
इनमें कई नेता पश्चिमी यूपी के हैं। उदाहरण के तौर पर अकेले मेरठ जिले में चार नेताओं को लालबत्ती दे दी गई। इनमें तीन नेता मुस्लिम और एक जाट हैं। इसे मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वोटों के समीकरण को साधने की रणनीति का हिस्सा माना गया।
खुद मुलायम सिंह यादव ने वोटों का हिसाब-किताब और क्षेत्रीय समीकरणों के मुताबिक लालबत्ती चाहने वालों का चयन कर रहे हैं।
उन्हीं के गणित को ध्यान में रखकर कई पूर्व विधायकों, पिछले चुनाव में हारे नेताओं, युवा संगठनों के पदाधिकारियों और टिकट से वंचित लोगों को भी लालबत्तियां दी गईं। अभी भी लालबत्ती और राज्यमंत्री के दर्जे के दावेदार कम नहीं है।
दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की सुविधाएं
40 हजार रुपये मानदेय, दौरे पर 600 रुपये प्रतिदिन जनसेवा भत्ता, कार का पेट्रोल, यात्रा भत्ता, मेडिकल एलाउंस, राजधानी में आवास, आफिस, गाड़ी आदि। बैठकों या सरकारी टूर के लिए ट्रेन और हवाई जहाज से यात्रा की भी सुविधा।
रुतबे का पूरा खेल
दरअसल पूरा खेल रुतबा हासिल करने का है। सियासत में इसी रुतबे से सब कुछ हासिल होता है। वोटों को लुभाने में भी यह रुतबा काम आता है। नेताओं के पास लंबी गाड़ियां हैं लेकिन सारी ऊर्जा लालबत्ती लगी सरकारी गाड़ी को पाने के लिए लग जाती हैं।