राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि विद्युत उपभोक्ताओं के लिए केवल प्रीपेड स्मार्ट मीटर की ही बाध्यता नहीं रखनी चाहिए। सरकार को उन्हें पोस्ट और प्रीपेड दोनों का विकल्प देना चाहिए। इस बाबत परिषद ने एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भी भेजने की बात कही है।
परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि केंद्र सरकार के नए कानून के अनुसार देश के सभी उपभोक्ताओं के घरों में 2025 तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि इससे क्या देश के उपभोक्ताओं का विकल्प का अधिकार नहीं छीना जा रहा है? अभी तक कानूनन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण व केंद्रीय नियमावली के तहत उपभोक्ताओं के पास प्रीपेड व पोस्टपेड बिजली संयोजन लेने का विकल्प है।
मुद्दा यह भी है कि अगले तीन वर्ष में अगर सभी उपभोक्ताओं को प्रीपेड स्मार्ट मीटर में तब्दील करना है तो अगले तीन वर्षों के लिए बिल रीडिंग और बिल वितरण के लिए लगभग 600 करोड़ का टेंडर क्यों फाइनल किया गया। उत्तर प्रदेश में विद्युत विभाग के पास उपभोक्ताओं का3379 करोड़ रुपये जमा है। क्या इस रकम को वापस किया जाएगा, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता परिषद् केंद्र सरकार को बहुत जल्द एक विधिक प्रस्ताव भेजेगा, जिसमें मांग की जाएगी कि विकल्प खुले होने चाहिए। यदि केंद्र सरकार यह चाहती है कि एक ही विकल्प रहे तो हर माह स्मार्ट मीटर पर वसूले जा रहे जीएसटी को माफ किया जाए। क्योंकि जब स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कोई भी एजेंसी या बिजली कंपनी खरीद करती है तो उस पर एकमुश्त जीएसटी अदा कर दिया जाता है। फिर हर माह उसे उपभोक्ताओं से क्यों वसूला जा रहा है।