फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी में सभी कंपनियों की तैयार होगी ‘360 डिग्री प्रोफाइल’, 30 अक्टूबर तक दिया गया समय

Sat, 17 Aug 2019 05:47 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन

वाणिज्यकर विभाग ने प्रदेश स्थित कंपनियों का ‘360 डिग्री प्रोफाइल’ तैयार कराने का फैसला किया है। इस संबंध में विभाग ने सभी जोन को 30 अक्तूबर तक ब्योरा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 360 डिग्री प्रोफाइल बनाते समय उन कंपनियों पर सबसे अधिक फोकस होगा, जो सबसे अधिक व्यापारिक गतिविधियों में शामिल वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित होंगी। ब्योरा तैयार होने के बाद नवंबर में इन कंपनियों की कर चोरी की प्रवृत्ति रोकने के लिए विस्तृत कार्ययोजना भी तैयारी की जाएगी।

विज्ञापन


दरअसल, प्रदेश में कई ऐसी कंपनियां हैं जिनपर विभाग का करोड़ों रुपये टैक्स बकाया हैं, लेकिन दिवालिया हो जाने से उनसे वसूली संभव नहीं हैं। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि ऐसी कंपनियों से वसूली की रकम के बराबर न तो संपत्तियां बची हैं और न ही उनके निदेशकों का ही पता है। इससे विभाग अब ऐसी कंपनियों से बकाये कर की वसूली में असमर्थ है।

इसके मद्देनजर ही अब यह फैसला किया गया है कि प्रदेश स्थित सभी कंपनियों की ‘360 डिग्री प्रोफाइल’ तैयार कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार के नुकसान से बचा जा सके। वाणिज्यकर आयुक्त अमृता सोनी ने सभी जोन के एडिशनल कमिश्नरों को अपने-अपने जोन की कंपनियों का ‘360 डिग्री प्रोफाइल’ हर हाल में 30 अक्तूबर तक तैयार करने का निर्देश दिया है। प्रोफाइलिंग का काम सबसे बड़ी कंपनी से शुरू करके सबसे छोटे कंपनी तक किया जाएगा।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

हर जोन में गठित होगी एक टीम

‘360 डिग्री प्रोफाइल तैयार करने के लिए सभी जोन में ज्वाइंट कमिश्नर (कॉर्पोरेट सर्किल) के नेतृत्व में एक टीम बनेगी। इसमें जरूरत के मुताबिक डिप्टी व असिस्टेंट कमिश्नरों के अलावा वाणिज्यकर अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। टीम में कंप्यूटर पर कार्य करने वाला एक दक्ष कर्मचारी भी होगा, ताकि प्रोफाइलिंग के दौरान मिलने वाली सूचना को तत्काल कंप्यूटर में दर्ज किया जा सके।

ऐसे होती है ‘360 डिग्री प्रोफाइलिंग’
‘360 डिग्री प्रोफाइलिंग’ तैयार करने के दौरान अधिकारी कंपनियों के निदेशकों से सीधे मुलाकात न करके वहां काम करने वाले अन्य कर्मचारियों से संपर्क करते हैं। कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों से ही अलग-अलग कंपनी और निदेशकों की संपत्तियों व आय के अन्य स्रोतों का पता कर पूरा ब्योरा एकत्र किया जा जाता है। ताकि कभी भी कंपनी डिफॉल्टर हो तो उनकी संपत्तियों से बकाये रकम की वसूली की जा सके।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें