जनता को बेहतर प्रशासन देने में कटिबद्घ नजर आ रहे अखिलेश ने अफसरों के पेंच कसने के लिए छापामार रणनीति अपनाने का फैसला किया है।
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मुख्य सचिव आलोक रंजन ने मंडलायुक्तों को स्थानीय निकायों की तरफ से जनसुविधाएं मुहैया कराने में हीलाहवाली पर नजर रखने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव ने कहा कि इस पर छापामार तरीके काम किया जाए जिससे कि लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि मंडलायुक्त जिलावार हर माह इसकी समीक्षा करें कि निकायों द्वारा आम लोगों को सामान्य तरीके से दी जाने वाली सुविधाओं में हीलाहवाली क्यों होती है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोरता से कार्रवाई की जाए।
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उन्होंने कहा, विकास कार्यों की बैठकों में पुलिस अधिकारियों को भी बुलाया जाए ताकि समन्वय बना रहे। कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों पर भी परस्पर तालमेल रहे।
दिया कठोर कार्रवाई का निर्देश
मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि अचानक निरीक्षण किए जाएं और अगर कहीं कोई गड़बड़ी मिले तो कठोर कार्रवाई हो। उन्होंने खुद भी औचक निरीक्षण करने की बात कही।
साथ ही चेतावनी दी कि निर्देशों के पालन में ढिलाई या लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा, नगर निकायों के स्वायत्त इकाई के रूप में अस्तित्व में आने के बाद भी समन्वित नियोजन के अभाव में लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
नगर निकायों का अन्य इकाइयों एवं संगठनों के साथ आपसी समन्वय न होने से नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित विकास नहीं हो पाता। साथ ही निकायों की शासन पर अनावश्यक निर्भरता बढ़ रही है।
स्थानीय निकाय नहीं कर रहे जनता की मदद
प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में आम आदमी को मूलभूत नागरिक सुविधाएं जैसे आवास, पेयजल, सड़कें, गलियां, जलनिकासी, सफाई व्यवस्था, कूड़ा-कचरा निस्तारण, सीवर, जल निकासी, मार्ग प्रकाश, पार्क, स्वच्छ पर्यावरण, नगरीय परिवहन आदि सुविधाएं मुहैया कराने के लिए ही आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, नगर विकास विभाग, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम विभाग तथा पावर कॉर्पोरेशन बनाए गए थे।
स्थानीय स्तर पर लोगों को सुविधा मुहैया कराने के लिए आवास विकास परिषद, जल निगम, जल संस्थान, नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत, जिला नगरीय विकास अभिकरण बनाए गए हैं। फिर भी जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पाती।