केंद्र में सरकार बन जाने से भाजपा नेता उत्तर प्रदेश में खुलकर दबंगई कर रहे हैं। कांठ हिंसा मामले में एक भाजपा नेता ने अफसरों को धमकी दी है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बुधवार को जेल में बंद भाजपाइयों से मुलाकात के बाद ब्यूरोक्रेसी को चेताया कि जल्द सूबे में भाजपा की सरकार बनेगी उसके बाद इन अफसरों से चुन-चुन कर भाजपा कार्यकर्ताओं के जख्मों का हिसाब लिया जाएगा।
उन्होंने प्रदेश की सपा सरकार पर भी जमकर हमला बोला और कहा कि कांठ थाने में भाजपा कार्यकर्ताओं को जूतों से पीटा गया। सरकार और प्रशासन ने अंग्रेजों के अत्याचार की सीमा को भी लांघ दिया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन और प्रदेश सरकार ने ये जख्म कार्यकर्ताओं के जिस्म पर नहीं बल्कि भाजपा के दिल पर किए हैं, जिनका हिसाब तुष्टिकरण में अंधी सरकार और बेलगाम ब्यूरोक्रेसी को देना होगा।
भाजपाइयों ने काटा हंगामा
गौरतलब है कि कांठ में महापंचायत करने के लिए निकले भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लॉकअप में बंद कर दिया था। जिनसे मिलने के लिए पार्टी प्रदेश महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह आए थे।
वह मंगलवार रात को करीब तीन बजे ही मुरादाबाद पहुंच गए थे। सुबह उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की और दोपहर करीब साढ़े ग्यारह बजे कांठ बवाल में बंद भाजपाइयों से मिलने के लिए जिला जेल पहुंचे।
लेकिन जेल प्रशासन ने नियम के मुताबिक उन्हें इंतजार करने को कहा। करीब आधा घंटा तक स्वतंत्र देव सिंह जेल के गेट पर खड़े रहे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और जेल अफसरों के खिलाफ नारेबाजी भी की।
जेल से मिलाई कर लौटे स्वतंत्र देव सिंह बोले, कार्यकर्ताओं को इस क्रूरता के साथ कांठ थाने में पीटा गया है जिससे अंग्रेजी हुकूमत की याद ताजा हो गई है। उन्होंने यूपी में भाजपा की सरकार बनने पर अफसरों को परिणाम भुगतने की धमकी दी।
पार्टी के कहने पर ही आए थे कांठ
मंदिर पर लाउडस्पीकर के मुद्दे को लेकर महापंचायत का ऐलान करने वाली भाजपा को न तो अब मंदिर याद रहा और न ही लाउडस्पीकर। आलम ये है कि पार्टी ने कांठ थाने की लॉकअप में पुलिस के हाथों पिटे जिलों के अपने अहम ओहदेदारों समेत बाकी 60 कार्यकर्ताओं को भी उनके हाल पर छोड़ दिया है।
पार्टी इस मुद्दे को तूल देने के मूड में नहीं है। छोटे मोटे नेताओं के आने का सिलसिला जारी है ताकि कार्यकर्ताओं को एकदम से ये एहसास न हो कि उन्हें पार्टी ने तन्हा छोड़ दिया है।
जिला जेल की बैरकों में गर्मी में सड़ रहे भाजपा के इन सभी साठ पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की कॉल पर ही कांठ के लिए कूच किया था।
रास्ते में पकड़े गए, थाने में पुलिस के हाथों बेरहमी से पिटे, जख्मी हुए और जेल पहुंच गए। लेकिन इसके बावजूद पार्र्टी ने मुद्दे को उस गरमजोशी से नहीं उठाया जिसकी उम्मीद जेल गए कार्यकर्ताओं को थी।
पार्टी सांप्रदायिकता को तूल नहीं देगी
प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के आदेश पर मामले की जांच करने आई भाजपा विधायकों की समिति तो यहां तक कह गई कि भाजपा ने कांठ महापंचायत कॉल की ही नहीं थी। पार्टी के इस कदम से साफ है कि वो सांप्रदायिकता के आधार पर किसी भी मुद्दे को तूल देने के मूड में नहीं है।
दिल्ली में उसकी सरकार है और यदि उसी के नेताओं की वजह से हालात बिगड़े तो सरकार दिल्ली में घिरेगी। पार्टी के आला ओहदेदारों की मानें तो यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी मुरादाबाद आने से कतरा रहे हैं।
साठ भाजपाइयों को जेल गए छह दिन बीत गए और प्रदेश अध्यक्ष या कोई भी बड़ा नेता मुरादाबाद नहीं पहुंचा, इससे साबित है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर नहीं है।
ऐसे में अपने जेल जाने पर किसी बड़े आंदोलन की उम्मीद लगाए बैठे भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता निराश हैं। मंदिर और लाउडस्पीकर समेत दलित महिलाओं की पिटाई को तो भाजपा नेताओं ने ठंडे बस्ते में डाल ही दिया है।